भारतीय सेना के 'सिग्नल कोर' का 116वां स्थापना दिवस: सीमाओं पर गूंजता 'तीव्र चौकस' का संकल्प!
15 फरवरी 2026 को भारतीय सेना के कोर ऑफ सिग्नल्स ने अपना 116वां स्थापना दिवस मनाया। जानें कैसे तकनीक और बहादुरी के संगम से यह कोर भारतीय सेना की 'नसों और तंत्रिका तंत्र' के रूप में काम करता है।

नई दिल्ली:
आज का दिन भारतीय सेना के लिए बेहद खास है। जब हम सीमा पर तैनात किसी जवान की बहादुरी की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे जेहन में बंदूकें और टैंक आते हैं। लेकिन रणभूमि के उस शोर में एक मौन योद्धा भी होता है, जिसके बिना जीत का कोई भी नक्शा पूरा नहीं हो सकता। आज भारतीय सेना का 'कोर ऑफ सिग्नल्स' (Corps of Signals) अपना 114वां स्थापना दिवस मना रहा है।
116 वर्षों का यह सफर केवल संचार का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की रक्षा के लिए खुद को तकनीक की कसौटी पर तपाने की एक गौरवशाली गाथा है।
1. सेना का 'तंत्रिका तंत्र' (Nervous System)
कल्पना कीजिए कि शरीर में दिमाग तो है, लेकिन नसें काम करना बंद कर दें। ठीक यही स्थिति युद्ध के मैदान में सेना की होती है यदि संचार व्यवस्था ठप हो जाए। कोर ऑफ सिग्नल्स को भारतीय सेना का 'तंत्रिका तंत्र' कहा जाता है। इनका आदर्श वाक्य है—'तीव्र चौकस' (Swift and Alert)।
चाहे सियाचिन की हाड़ कंपा देने वाली बर्फ हो या राजस्थान का तपता हुआ रेगिस्तान, सिग्नल कोर के जांबाज यह सुनिश्चित करते हैं कि कमांडिंग ऑफिसर और मोर्चे पर लड़ रहे जवान के बीच संपर्क का एक पल के लिए भी विच्छेद न हो।
2. 1911 से 2026 तक: एक ऐतिहासिक सफर
सिग्नल कोर की स्थापना 15 फरवरी 1911 को हुई थी। तब से लेकर आज तक, संचार के माध्यम बदल गए हैं। शुरुआत में झंडों और रनर्स के जरिए संदेश भेजे जाते थे, फिर टेलीफोन और वायरलेस आए।
आज 2026 में, हमारा सिग्नल कोर साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और सैटेलाइट कम्युनिकेशन के युग में प्रवेश कर चुका है। आज की जटिल युद्ध परिस्थितियों (Electronic Warfare) में यह कोर दुश्मन के रेडियो सिग्नल को जाम करने और अपनी गोपनीय सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक 'क्वांटम कंप्यूटिंग' जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है।
3. 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' के दौर में कोर की भूमिका
आज के दौर में युद्ध केवल गोलियों से नहीं, बल्कि डेटा से भी लड़ा जाता है। दुश्मन देश साइबर हमलों के जरिए हमारी संचार व्यवस्था को ठप करने की कोशिश करते हैं। 116वें स्थापना दिवस पर कोर ऑफ सिग्नल्स ने अपनी उन क्षमताओं का प्रदर्शन किया है जो न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं, बल्कि दुश्मन के डिजिटल मंसूबों को भी नाकाम करती हैं।
भारतीय सेना द्वारा विकसित 'अस्मि' (ASMI) और अन्य स्वदेशी सुरक्षित संचार ऐप्स इसी कोर की देन हैं, जो विदेशी सॉफ्टवेयर्स पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं।
4. आपदा के समय 'देवदूत' की भूमिका
सिग्नल कोर की भूमिका केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। जब भी देश पर कोई प्राकृतिक आपदा आती है—जैसे भूकंप या बाढ़—और मोबाइल टावर गिर जाते हैं, तब ये जांबाज ही सबसे पहले पहुँचकर 'इमरजेंसी कम्युनिकेशन ग्रिड' स्थापित करते हैं। उत्तराखंड की त्रासदी हो या दक्षिण भारत के चक्रवात, सिग्नल कोर ने हमेशा यह साबित किया है कि तकनीक का सही उपयोग जान बचाने में सबसे कारगर हथियार है।
5. मानवीय पहलू: गुमनाम नायक
अक्सर पदक और चर्चा उन सैनिकों को मिलती है जो सीधे हमले का हिस्सा होते हैं, लेकिन सिग्नल कोर के जवान उन गुमनाम नायकों की तरह हैं जो पर्दे के पीछे रहकर जीत की पटकथा लिखते हैं। एक जवान जो आधी रात को तेज बारिश में भी पहाड़ की चोटी पर बैठकर सिग्नल टावर ठीक करता है ताकि पीछे बैठी यूनिट को निर्देश मिल सकें, उसकी बहादुरी किसी युद्ध नायक से कम नहीं है।
6. भविष्य की तैयारी: डिजिटल योद्धा
116वें कोर दिवस पर सेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन योद्धाओं को बधाई देते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को दोहराया। अब भारतीय सेना अंतरिक्ष आधारित संचार (Space-based communication) की ओर बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में, सिग्नल कोर न केवल सेना को जोड़ेगा, बल्कि अंतरिक्ष में भारत की सैन्य उपस्थिति का भी नेतृत्व करेगा।
संपर्क ही सुरक्षा है
आज 15 फरवरी 2026 को जब हम 'कोर ऑफ सिग्नल्स' के 116वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं, तो हमें उन हजारों गुमनाम सैनिकों को सलाम करना चाहिए जिनकी मुस्तैदी की वजह से हमारी सेना 'तीव्र और चौकस' बनी रहती है। यह कोर हमें सिखाता है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सही समय पर दी गई सही सूचना से जीता जाता है।
भारतीय सेना के गौरवशाली सिग्नल कोर को उनके स्थापना दिवस पर कोटि-कोटि नमन!

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
