प्रकृति का 'सफेद सोना' या स्वास्थ्य के लिए खतरा? जाने लेटेक्स रबर का रहस्य विस्तार से
क्या आप जानते हैं लेटेक्स रबर कैसे बनता है और यह आपकी सेहत के लिए कितना सुरक्षित है? जानिए पेड़ों से निकलने वाले 'सफेद सोने' के पीछे का विज्ञान। लेटेक्स के उपयोग, इसके अद्भुत लचीलेपन और लेटेक्स एलर्जी (Latex Allergy) के खतरों पर एक विशेष रिपोर्ट। 2026 में रबर उद्योग के बदलते स्वरूप और प्राकृतिक बनाम सिंथेटिक लेटेक्स की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

natural latex rubber production process : दुनिया जब धीरे-धीरे प्लास्टिक और सिंथेटिक उत्पादों से दूरी बना रही है, ऐसे में 'लेटेक्स रबर' (Natural Latex) एक बार फिर सुर्खियों में है। पेड़ों से निकलने वाले इस दूधिया तरल पदार्थ को आज के दौर का 'सफेद सोना' कहा जा रहा है। 2026 की नवीनतम औद्योगिक रिपोर्टों के अनुसार, चिकित्सा उपकरणों से लेकर लग्जरी गद्दों (Mattresses) तक, प्राकृतिक लेटेक्स की मांग में 15% का उछाल देखा गया है। हालांकि, इसकी लोकप्रियता के साथ-साथ विशेषज्ञों ने 'लेटेक्स एलर्जी' और इसके प्रसंस्करण (Processing) से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं पर एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी जारी की है।
लेटेक्स के बनने की कहानी जितनी प्राकृतिक है, उतनी ही तकनीकी भी। 'हीविया ब्रासिएन्सिस' के पेड़ों से मिलने वाला यह कच्चा तरल सीधा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे 'वल्केनाइजेशन' नामक एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जहाँ इसे सल्फर के साथ गर्म करके कठोर और लचीला बनाया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्राकृतिक रबर में मौजूद 'पॉलीआइसोप्रीन' इसे दुनिया का सबसे लचीला पदार्थ बनाता है। यही कारण है कि टायर उद्योग से लेकर सर्जिकल दस्तानों तक, लेटेक्स का कोई दूसरा विकल्प अब तक विज्ञान नहीं ढूंढ पाया है।
परंतु, इस 'चमत्कारी तरल' का एक काला पक्ष भी है। वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 6 प्रतिशत आबादी को लेटेक्स में मौजूद प्राकृतिक प्रोटीन से गंभीर एलर्जी है। डॉक्टरों का कहना है कि लेटेक्स के संपर्क में आने से त्वचा पर चकत्ते से लेकर सांस लेने में तकलीफ (Anaphylaxis) तक हो सकती है। इसके अलावा, पर्यावरण की दृष्टि से जहाँ प्राकृतिक लेटेक्स 'बायोडिग्रेडेबल' होने के कारण प्लास्टिक से बेहतर है, वहीं इसके बागानों के लिए हो रही जंगलों की कटाई एक नई कानूनी और नैतिक चुनौती बनकर उभरी है।
लेटेक्स रबर आधुनिक जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा बन चुका है। चाहे वह आपके जूतों के तलवे हों या जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण, हम पूरी तरह से इस प्राकृतिक रबर पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भविष्य 'सिंथेटिक और प्राकृतिक लेटेक्स' के मिश्रण में है, ताकि एलर्जी के जोखिम को कम किया जा सके और पर्यावरण को भी बचाया जा सके। यह स्पष्ट है कि प्रकृति का यह उपहार तभी तक सुरक्षित है जब तक हम इसके वैज्ञानिक संतुलन को समझते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
