cdac developed cloud based esushrut clinic software for doctors : भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को पूरी तरह से डिजिटल मुख्यधारा में लाने और ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों के छोटे क्लीनिकों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को औपचारिक रूप से 'ई-सुश्रुत क्लिनिक' (e-Sushrut Clinic) नामक एक क्रांतिकारी हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम को राष्ट्र को समर्पित किया। देश के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में यह लॉन्चिंग एक ऐसे मील का पत्थर के रूप में देखी जा रही है, जो अब तक बड़े अस्पतालों तक सीमित रहने वाली डिजिटल सुविधाओं को सुदूर अंचलों के ओपीडी (OPD) क्लीनिकों के दरवाजे तक बेहद मामूली कीमत पर पहुंचा देगी। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित यह अभूतपूर्व डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को गति देगा, बल्कि देश के चिकित्सा तंत्र को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।

इस दूरगामी तकनीकी पहल की आवश्यकता और इसके जमीनी प्रभाव को समझें तो देश के अधिकांश छोटे ओपीडी क्लीनिक आज के आधुनिक दौर में भी पारंपरिक और मैनुअल कागजी व्यवस्था पर निर्भर हैं। बाजार में उपलब्ध बड़े अस्पतालों के मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर इतने महंगे और जटिल होते हैं कि छोटे डॉक्टरों और क्लीनिक संचालकों के लिए उन्हें अपनाना आर्थिक और प्रशासनिक रूप से लगभग असंभव होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी भारी विसंगति को दूर करने के लिए 'ई-सुश्रुत क्लिनिक' को एक 'लाइटवेट' यानी हल्के और क्लाउड-आधारित सिस्टम के रूप में तैयार किया है, ताकि बिना किसी विशेष तकनीकी ज्ञान के भी इसे आसानी से संचालित किया जा सके। सरकार की योजना इस प्रणाली को निजी क्लीनिकों के साथ-साथ देश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में भी अनिवार्य रूप से लागू करने की है। इस सिस्टम की स्वीकार्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉन्चिंग के शुरुआती दौर में ही 800 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और इसके माध्यम से 680 से अधिक लाइव डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी सफलतापूर्वक तैयार किए जा चुके हैं।

तकनीकी और विधिक मोर्चे पर इस प्रणाली को बेहद सुरक्षित और बहुआयामी बनाया गया है। एक ही सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म पर मरीजों का डिजिटल पंजीकरण, ऑटोमैटिक बिलिंग, एमआईएस (MIS) रिपोर्टिंग, डॉक्टरों के लिए आसान स्पीच-टू-टेक्स्ट (बोलकर पर्चा लिखने की सुविधा), क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से जुड़े रिकॉर्ड को खोजने जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। विधिक सुरक्षा और मेडिकल एथिक्स को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह अनिवार्य नियम बनाया है कि इस डिजिटल सुविधा का उपयोग केवल वही चिकित्सक कर सकेंगे जो राष्ट्रीय स्तर की 'हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री' में आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं। इस कड़े प्रावधान से फर्जी और झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा डिजिटल टूल्स के दुरुपयोग की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, इस डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और सी-डैक के बीच एक आधिकारिक विधिक समझौता (MoU) किया जा रहा है, जिसके तहत सी-डैक इस सॉफ्टवेयर के निरंतर अपग्रेडेशन और तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि एनएचए वित्तीय व बुनियादी सहयोग देगा, जिसमें मरीजों को भेजे जाने वाले एसएमएस और क्लाउड होस्टिंग का पूरा खर्च शामिल है।

इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना का सबसे आकर्षक और गेम-चेंजिंग पहलू इसकी वहनीय कीमत संरचना है। 'ई-सुश्रुत क्लिनिक' की वास्तविक व्यावसायिक कीमत वैसे तो 499 रुपये प्रति माह (पांच उपयोगकर्ताओं के लिए) निर्धारित की गई है, लेकिन आम जनता और डॉक्टरों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) इस पर प्रति माह 200 रुपये की भारी वित्तीय सब्सिडी प्रदान कर रहा है। इस सरकारी मदद के बाद डॉक्टरों के लिए इसका प्रभावी मासिक शुल्क घटकर मात्र 299 रुपये रह जाता है। इतना ही नहीं, डॉक्टरों को तकनीक से परिचित कराने के लिए शुरुआती तीन महीने यह सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क यानी फ्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके बाद पांच से अधिक स्टाफ सदस्य जोड़ने पर प्रति अतिरिक्त यूजर महज 50 रुपये का मामूली शुल्क देय होगा।

'ई-सुश्रुत क्लिनिक' का यह देशव्यापी आगाज विकसित भारत के डिजिटल हेल्थ मिशन को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने वाला है। 299 रुपये के इस छोटे से मासिक निवेश से देश के लाखों छोटे क्लीनिक सीधे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, जिससे मरीजों के मेडिकल इतिहास को सुरक्षित रखना और देशभर में कहीं भी एक्सेस करना बेहद आसान हो जाएगा। यह विधिक और प्रशासनिक सुधार आने वाले समय में न केवल डॉक्टरों की कार्यकुशलता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि देश के अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक के लिए भी त्वरित, प्रामाणिक और पेपरलेस इलाज सुनिश्चित कर भारतीय स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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