कभी सोचा है भूख क्यों लगती है? आखिर क्या है शरीर और मस्तिष्क के बीच का विज्ञान
हमें भूख क्यों लगती है? यह लेख भूख के पीछे छिपी वैज्ञानिक प्रक्रिया, हार्मोन की भूमिका, मस्तिष्क और पेट के बीच संवाद तथा ब्लड शुगर से जुड़े कारणों को विस्तार से समझाता है। जानिए कैसे भूख शरीर की एक जरूरी चेतावनी प्रणाली है।

भूख लगने के वैज्ञानिक कारण
सुबह उठते ही पेट में होने वाली हल्की-सी गड़गड़ाहट से लेकर दिन के किसी भी समय अचानक खाने की तीव्र इच्छा भूख एक ऐसा अनुभव है जिसे हर इंसान रोज़ महसूस करता है। यह केवल पेट के खाली होने का संकेत नहीं है, बल्कि शरीर और मस्तिष्क के बीच चलने वाले एक जटिल जैविक संवाद का परिणाम है। वैज्ञानिक दृष्टि से भूख शरीर की एक आवश्यक चेतावनी प्रणाली है, जो जीवन को संतुलित और सक्रिय बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
मानव शरीर को हर पल ऊर्जा की जरूरत होती है। यह ऊर्जा भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा से प्राप्त होती है। जब शरीर में उपलब्ध ऊर्जा का स्तर घटने लगता है, तो मस्तिष्क को संकेत भेजे जाते हैं कि अब भोजन की आवश्यकता है। इस पूरी प्रक्रिया का नियंत्रण मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से, हाइपोथैलेमस, के हाथ में होता है। यही भाग शरीर में ऊर्जा संतुलन, भूख और तृप्ति को नियंत्रित करता है।
भूख लगने में हार्मोन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जब पेट खाली होता है, तो उसमें मौजूद कोशिकाएं घ्रेलिन नामक हार्मोन का स्राव करती हैं। इसे ‘हंगर हार्मोन’ कहा जाता है। घ्रेलिन रक्त के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचकर यह संदेश देता है कि शरीर को भोजन चाहिए। इसके विपरीत, भोजन करने के बाद लेप्टिन नामक हार्मोन सक्रिय होता है, जो यह संकेत देता है कि पेट भर चुका है और अब खाना बंद किया जा सकता है।
सिर्फ पेट ही नहीं, बल्कि रक्त में शर्करा का स्तर भी भूख को प्रभावित करता है। जब ब्लड शुगर गिरने लगती है, तो शरीर को ऊर्जा की कमी महसूस होती है। यह स्थिति थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी के रूप में सामने आ सकती है। ऐसे में मस्तिष्क तुरंत भोजन की मांग करता है, ताकि ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य रखा जा सके।
भूख का संबंध केवल शारीरिक जरूरतों से नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक कारणों से भी जुड़ा होता है। तनाव, चिंता, नींद की कमी और भावनात्मक असंतुलन कई बार ‘भावनात्मक भूख’ को जन्म देते हैं, जिसमें व्यक्ति को ऊर्जा की आवश्यकता न होने पर भी खाने की इच्छा होती है। आधुनिक जीवनशैली में यह एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर और संतुलित भोजन न करने से भूख की प्राकृतिक प्रणाली प्रभावित हो सकती है। अनियमित खान-पान, अत्यधिक जंक फूड और लंबे समय तक उपवास शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिससे बार-बार भूख लगना या बिल्कुल भूख न लगना जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
भूख वास्तव में शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है, जो यह सुनिश्चित करता है कि उसे जीवित रहने के लिए आवश्यक ऊर्जा मिलती रहे। इसे नजरअंदाज करना या गलत तरीके से नियंत्रित करना लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए भूख को समझना और उसका सम्मान करना स्वस्थ जीवन की बुनियादी शर्त है। शरीर की इस प्राकृतिक चेतावनी को पहचानकर सही समय पर सही भोजन करना ही संतुलित और सक्रिय जीवन की कुंजी माना जाता है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
