गुजरात में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान चांदीपुरा वायरस संक्रमण के सात मामलों की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इस वायरल प्रकोप के कारण अब तक तीन बच्चों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि चार अन्य मरीज वर्तमान में उपचार के तहत हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वायरस से प्रभावित सभी मरीज 10 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। प्रशासन द्वारा 27 संदिग्ध मरीजों के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 12 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, सात पॉजिटिव पाए गए और आठ मरीजों के परिणाम अभी प्रतीक्षित हैं।

चांदीपुरा वायरस, जो रैब्डोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस से संबंधित है, मुख्य रूप से मच्छरों, किलनी और सैंड फ्लाई (रेत की मक्खी) जैसे वाहकों के माध्यम से फैलता है। संक्रमण के लक्षणों में तेज बुखार और फ्लू जैसी स्थिति शामिल है, जो आगे चलकर एक्यूट एन्सेफलाइटिस या मस्तिष्क में सूजन जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकती है। इस वायरस की पहचान सर्वप्रथम 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके बाद से ही इसे इसी नाम से जाना जाता है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के साथ मिलकर सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने स्पष्ट किया है कि सभी बाल रोग विशेषज्ञों और निजी क्लीनिक संचालकों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। चिकित्सा पेशेवरों को सलाह दी गई है कि संदिग्ध मामले मिलते ही बिना समय गंवाए मरीज को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा वाले बड़े अस्पताल में रेफर करें। सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का दावा किया है।

पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए, विभाग ने उन 61 स्थानों पर बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, जहां 2024 में संक्रमण के मामले दर्ज किए गए थे। इन क्षेत्रों में सैंड फ्लाई की आबादी को नियंत्रित करने के लिए सघन सैनिटाइजेशन, धूम्रीकरण और कीटनाशक छिड़काव का कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। आम जनता के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं ताकि मच्छरों और रेत की मक्खी के पनपने वाले स्थानों को समाप्त किया जा सके। प्रशासन की तत्परता और समय पर की गई चिकित्सा सहायता ही इस वायरस के प्रसार को रोकने का एकमात्र प्रभावी साधन है।

Lalita Rajput

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इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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