नोहर के आदर्श विद्या मंदिर में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर माँ सरस्वती पूजन और भव्य हवन का आयोजन किया गया। समाजसेवी सुरेश पांडिया, राजू सरावगी और प्रधानाध्यापक रमेश पारीक की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विद्यार्थियों का नवीन कक्षाओं में प्रवेश कराया गया। शिक्षा और संस्कारों के इस संगम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

नोहर। ज्ञान, सुर और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदे के प्राकट्य उत्सव 'बसंत पंचमी' के पावन अवसर पर शनिवार को नोहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय परिसर श्रद्धा और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम का साक्षी बना। चहुंओर फैली पीले फूलों की आभा और वातावरण में गूँजते वैदिक मंत्रों के बीच विद्यालय परिवार ने शिक्षा और संस्कारों के समन्वय की एक अनुपम मिसाल पेश की। माँ सरस्वती के पूजन और भव्य हवन अनुष्ठान के साथ न केवल प्रकृति के नव-श्रृंगार का स्वागत किया गया, बल्कि नन्हें शिक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखी गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी सुरेश पांडिया, विशिष्ट अतिथि राजू सरावगी एवं ओम बबूलानी के सान्निध्य में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रधानाध्यापक रमेश पारीक के कुशल निर्देशन में आयोजित इस समारोह में पंडितों द्वारा उच्चारित मंत्रोच्चार ने संपूर्ण परिसर को ऊर्जावान बना दिया। हवन कुंड में आहुतियां देते हुए छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने विद्या की देवी से बुद्धि, विवेक और सदाचार का वरदान मांगा। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के बीच विद्यालय में नवीन सत्र के लिए विद्यार्थियों का 'विद्यारंभ' संस्कार करवाया गया, जिसमें बच्चों को नवीन कक्षाओं में प्रवेश दिलाकर उनके शैक्षणिक सफर की मंगलमयी शुरुआत की गई।

उपस्थित वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श विद्या मंदिर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। समाजसेवी सुरेश पांडिया और राजू सरावगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला, वहीं ओम बबूलानी ने संस्कारों के साथ शिक्षा ग्रहण करने की बात कही। प्रधानाध्यापक रमेश पारीक ने आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्र का सर्वांगीण विकास करना है।

समारोह के समापन पर उपस्थित सभी अभिभावकों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के बीच श्रद्धापूर्वक प्रसाद का वितरण किया गया। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि आधुनिक शिक्षा की सीढ़ियां चढ़ते हुए अपनी सनातन परंपराओं को अक्षुण्ण रखना ही वास्तविक प्रगति है। समूचे विद्यालय स्टाफ और क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति ने इस उत्सव को एक सामूहिक उत्सव के रूप में जीवंत कर दिया।

Pratahkal Bureau

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