नोहर अस्पताल में डायलिसिस सेवा 15 दिन से बंद, मरीज प्रभावित
आरओ प्लांट खराबी से चारों मशीनें बंद, रोज 7–8 मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर

नोहर उप जिला चिकित्सालय में आरओ प्लांट खराब होने से 15 दिनों से डायलिसिस सेवा बंद है, जिससे रोज 7–8 मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।
नोहर, 28 अप्रैल। उप जिला चिकित्सालय में पिछले 15 दिनों से डायलिसिस सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है, जिससे किडनी रोगियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में स्थापित चारों डायलिसिस मशीनें बंद होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार डायलिसिस सेवा के संचालन के लिए लगाए गए आरओ (आरो) सिस्टम में खराबी आने के कारण मशीनें कार्य नहीं कर पा रही हैं। यही वजह है कि पिछले दो सप्ताह से यह महत्वपूर्ण सेवा ठप है। अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 7 से 8 मरीज डायलिसिस के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सेवा बंद होने के चलते उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे दामों पर डायलिसिस करानी पड़ रही है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ मानसिक तनाव भी गहरा गया है।
मरीजों का आरोप है कि डायलिसिस सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी द्वारा मशीनों के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। कंपनी के जिम्मे मशीनों की देखरेख और दवाइयों की व्यवस्था है, लेकिन समय पर मेंटेनेंस नहीं होने से अक्सर सेवाएं प्रभावित होती रहती हैं। कई बार डायलिसिस से जुड़ी आवश्यक दवाइयों की कमी भी बनी रहती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर मरीजों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से अस्पताल में डायलिसिस यूनिट स्थापित की थी, लेकिन बार-बार तकनीकी खामियों और लापरवाही के कारण इसका पूर्ण लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है। राज्य सरकार स्तर पर डायलिसिस सेवा के संचालन को लेकर एक निजी कंपनी के साथ एमओयू किया गया है, जिसके तहत मशीनों के संचालन और दवा व्यवस्था की जिम्मेदारी कंपनी को सौंपी गई है।
उधर, उप जिला चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. हंसराज शर्मा ने बताया कि आरो प्लांट में खराबी के कारण सेवा बंद है। इस संबंध में संबंधित कंपनी को फोन और पत्र के माध्यम से सूचना दे दी गई है और जल्द ही सेवा बहाल होने की उम्मीद जताई गई है। लगातार ठप पड़ी इस सेवा ने मरीजों की जीवनरक्षक जरूरतों को संकट में डाल दिया है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति उजागर हो रही है।

