नोहर की ग्राम पंचायत चकराजासर में घुमंतु बच्चों के लिए बाल संस्कार केंद्र का शुभारंभ किया गया। निवर्तमान चेयरमैन बलबीर सुथार ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लिया। जानिए कैसे यह केंद्र गाडिया लोहार परिवारों के नौनिहालों के जीवन में बदलाव लाएगा और कौन-कौन इस ऐतिहासिक पहल का साक्षी बना।

नोहर। शिक्षा के उजियारे से अब कोई भी आंगन अछूता नहीं रहेगा, इसी संकल्प को चरितार्थ करते हुए नवनिर्मित ग्राम पंचायत चकराजासर में एक नई सुबह का उदय हुआ है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत घुमंतु परिवारों के बच्चों को ज्ञान के प्रकाश से जोड़ने के पावन उद्देश्य के साथ 'बाल संस्कार केंद्र' का भव्य शुभारंभ किया गया है। यह केंद्र न केवल इन बच्चों को साक्षर बनाएगा, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखेगा।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कृषि उपज मंडी के निवर्तमान चेयरमैन बलबीर सुथार ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस भावपूर्ण क्षण के साक्षी बने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बलबीर सुथार ने कहा कि शिक्षा ही वह एकमात्र मार्ग है जिससे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का उत्थान संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की यह दृढ़ मंशा है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए घुमंतु समुदाय के बच्चों हेतु इस विशेष केंद्र की स्थापना की गई है।

सुथार ने इस दौरान अपने सामाजिक सरोकारों को साझा करते हुए बताया कि गाडिया लोहार समाज के लिए 'महाराणा प्रताप कॉलोनी' को स्वीकृति दिलाने में उनका अथक प्रयास रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे भविष्य में भी इन परिवारों को मूलभूत सुविधाओं और सामाजिक उत्थान की कड़ियों से जोड़ने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। इस नवस्थापित केंद्र में शिक्षा का दायित्व अध्यापिका अंजू बाला को सौंपा गया है, जो बच्चों के मानसिक और संस्कारिक विकास पर कार्य करेंगी। सुथार ने केंद्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए हर संभव वित्तीय और नैतिक सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

इस गरिमामयी अवसर पर प्रदीप शर्मा, कुलदीप बावरा और घुमंतु जाति उत्थान न्यास हनुमानगढ़ के जिला संयोजक मोहनलाल लोहार विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बालूराम गाडिय़ा, काशीराम लोहार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों और घुमंतु परिवारों के सदस्यों ने भाग लिया। उपस्थित जनसमूह ने इस पहल को चकराजासर के सामाजिक इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम बताया। इस केंद्र की स्थापना से यह स्पष्ट संदेश गया है कि जब इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं का संगम होता है, तो परिवर्तन की बयार को कोई रोक नहीं सकता। यह बाल संस्कार केंद्र आने वाले समय में घुमंतु समाज के बच्चों के लिए प्रगति का द्वार साबित होगा।

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