हनुमानगढ़: गोगामेड़ी में नववर्ष पर उमड़ा आस्था का सैलाब, पांच लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी में नववर्ष मेला-2026 का 5 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य समापन हुआ। देवस्थान विभाग द्वारा आयोजित इस पांच दिवसीय उत्सव में पंच-गौरव शोभा यात्रा, सूफी गायन और राजस्थानी लोक नृत्यों की अद्भुत छटा बिखरी। सहायक आयुक्त श्री ओम प्रकाश के नेतृत्व में पहली बार सी.सी.टी.वी और लाइव दर्शन जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान की गईं।

हनुमानगढ़। श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति के अनूठे संगम के साथ हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी स्थित राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर श्री गोगाजी में नववर्ष मेला-2026 का अत्यंत गरिमामय और भव्य समापन हुआ। वर्ष के आगमन पर गोगाजी के दरबार में धोक लगाने के लिए जन-आस्था का ऐसा महाकुंभ उमड़ा कि समूचा मेला क्षेत्र 'जातरुओं' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। शुक्रवार को संपन्न हुए इस पांच दिवसीय मेले में देश के विभिन्न कोनों से लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं ने गोगाजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। देवस्थान विभाग और जिला प्रशासन के पुख्ता इंतजामों के बीच इस बार का आयोजन आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक वैभव का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।
मेले के आध्यात्मिक आकर्षण को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए इस बार देवस्थान विभाग द्वारा 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए सहायक आयुक्त श्री ओम प्रकाश के निर्देशन में पहली बार मंदिर परिसर में व्यापक सी.सी.टी.वी. नेटवर्क स्थापित किया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। इसके अतिरिक्त, मंदिर के बाहर दो बड़ी एल.सी.डी. स्क्रीन के माध्यम से गोगाजी के लाइव दर्शन की व्यवस्था की गई, जिसने भीड़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंदिर परिसर और निज मंदिर को प्राकृतिक एवं कृत्रिम फूलों से किसी स्वर्ग की भांति सजाया गया था, जबकि रात्रि के समय विशेष 'लाइव लाइटिंग शो' ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजन का मुख्य आकर्षण 'पंच-गौरव' कार्यक्रम (एक जिला एक पर्यटन) रहा, जिसके तहत 30 दिसंबर को एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा गोरख टीला से शुरू होकर श्री गोगाजी मंदिर तक पहुंची, जिसमें राजस्थान की बहुरंगी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। शोभा यात्रा की कमान सूरतगढ़ के मशकवादन दल और बीकानेर के सजे-धजे रोबीले ग्रुप ने संभाल रखी थी। इनके पीछे शेखावाटी का प्रसिद्ध चंग ढफ, सरदारशहर का डेरू ग्रुप और पाबुसर चूरू का ढोल चाली ग्रुप अपनी थाप से वातावरण में ऊर्जा भर रहे थे। ऊंटों के काफिले और कच्छी घोड़ी नृत्य के बीच स्थानीय कलाकारों ने बीन, बांसुरी और भपंग के वादन से राजस्थानी लोक कला की महत्ता को प्रतिपादित किया।
सांस्कृतिक संध्याओं ने इस उत्सव को एक नया आयाम दिया। जिला प्रशासन, देवस्थान विभाग और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में बाड़मेर के सूफी बैंड ने भपंग, मोरचंग और खडताल की जुगलबंदी के साथ रूहानी गायन प्रस्तुत किया। बीकानेर के भवाई नृत्य, जोधपुर के कालबेलिया और अजमेर के प्रसिद्ध चरी नृत्य ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। वहीं, श्रीगंगानगर के पंजाबी भांगड़ा दल ने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ समां बांध दिया। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए देवस्थान विभाग ने निःशुल्क रैन बसेरों में अलाव, बिस्तर और चल-शौचालयों की व्यवस्था की, जबकि 'विश्व कहानी केन्द्र हरियाणा' के सहयोग से निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित किया गया। पुलिस प्रशासन के मुस्तैद सहयोग ने यातायात और कानून व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा, जिससे यह नववर्ष मेला केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति और कुशल प्रबंधन का प्रतीक बन गया।

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