हनुमानगढ़: एथेनॉल फैक्ट्री पर छिड़े संग्राम के बीच धरातल पर उतरी हाईपावर कमेटी, क्या भू-जल की शुद्धता पर मंडरा रहा है खतरा?
हनुमानगढ़ के टिब्बी में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध के बीच उच्च स्तरीय समिति ने राठीखेड़ा का दौरा कर भू-जल के नमूने एकत्र किए। वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता अरविन्द अग्रवाल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने संघर्ष समिति के साथ बैठक कर उनकी आपत्तियों को सुना। वैज्ञानिक जांच के बाद यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जो इस परियोजना के पर्यावरणीय भविष्य का फैसला करेगी।

हनुमानगढ़, 04 जनवरी। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर उपजा जन-आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राठीखेड़ा चक 5 आरके में स्थापित होने वाली इस विवादास्पद परियोजना से होने वाले संभावित भू-जल प्रदूषण और पर्यावरणीय विनाश की आशंकाओं के बीच, रविवार को राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने सीधे युद्धस्तर पर मोर्चा संभाला। क्षेत्र के किसानों और आमजन की गहरी चिंताओं को देखते हुए गठित इस समिति ने न केवल धरातल पर निरीक्षण किया, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जिससे अब इस परियोजना के भविष्य पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
रविवार सुबह जैसे ही उच्च स्तरीय समिति के सदस्य क्षेत्र में पहुंचे, वहां का माहौल प्रशासनिक हलचल और जन-आकांक्षाओं से सराबोर हो गया। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता श्री अरविन्द अग्रवाल, भू-जल विभाग के मुख्य अभियंता श्री सूरजभान, केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण के वैज्ञानिक श्री शैलेंद्र सिंह तथा अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री उम्मेदी लाल मीना ने बारीकी से फैक्ट्री स्थल का मौका मुआयना किया। इस दौरान समिति ने किसी भी प्रकार की कोताही न बरतते हुए फैक्ट्री परिसर के भीतर स्थित बोरवेलों से पानी के नमूने लिए और भू-जल स्तर का सटीक मापन किया। इतना ही नहीं, फैक्ट्री के इर्द-गिर्द स्थित खेतों और ट्यूबवेलों से भी जल के नमूने एकत्र किए गए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस औद्योगिक इकाई का प्रभाव आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या पड़ेगा।
स्थलीय निरीक्षण के पश्चात संघर्ष की गूँज एसडीएम कार्यालय, टिब्बी तक पहुंची, जहाँ समिति के सदस्यों ने संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ एक गहन बैठक की। इस बैठक में ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने अपनी आशंकाओं को पुरजोर तरीके से रखा, जिसमें सबसे बड़ा डर क्षेत्र के जीवनदायिनी भू-जल के प्रदूषित होने का था। अधिकारियों ने संघर्ष समिति को आश्वस्त किया कि उनकी हर मांग और हर आपत्ति का तकनीकी एवं वैज्ञानिक आधार पर बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि एकत्रित किए गए नमूनों की जांच के बाद एक निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जो इस फैक्ट्री की नियति तय करेगी।
विदित रहे कि इस विवाद का पटाक्षेप करने के लिए बीते 12 दिसम्बर को संघर्ष समिति और वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के बीच हुई बैठक में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने पर सहमति बनी थी, जिसका विधिवत गठन 16 दिसम्बर को किया गया था। इस महत्वपूर्ण दौरे और बैठक के दौरान टिब्बी एसडीएम सत्यनारायण सुथार, जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता रामा किशन, भू-जल वैज्ञानिक बरकत अली और तहसीलदार हरीश टाक प्रशासनिक मोर्चे पर डटे रहे। वहीं संघर्ष समिति की ओर से सुखजीत सिंह चड्ढा, महंगा सिंह, इन्द्रजीत सिंह पन्नीवाली, नितिन ढाका, श्री सुधीर सारण और श्री बलजिंद्र बराड़ सहित अनेक जागरूक सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर यह साफ कर दिया कि वे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें उस वैज्ञानिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो विकास और विनाश के बीच की रेखा स्पष्ट करेगी।

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