हनुमानगढ़ में रबी फसल संवत 2082 की डिजिटल गिरदावरी प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभारी अधिकारी श्री मांगी लाल ने बताया कि अब किसान 'राज किसान गिरदावरी ऐप' के जरिए स्वयं अपने खेत की ऑनलाइन गिरदावरी कर सकते हैं। 5 मार्च 2026 तक चलने वाले इस सर्वे से एमएसपी पर फसल बेचना आसान होगा। युवाओं को बतौर सर्वेयर प्रति खसरा 10 रुपये मानदेय भी मिलेगा। पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें।

हनुमानगढ़। राजस्थान के प्रमुख कृषि प्रधान जिले हनुमानगढ़ में रबी फसल की गिरदावरी को लेकर एक बड़ा डिजिटल बदलाव देखने को मिल रहा है। रबी संवत 2082 की गिरदावरी प्रक्रिया का शंखनाद हो चुका है, जहाँ अब अन्नदाता को पटवारियों के पीछे चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। 1 जनवरी 2026 से शुरू हुई यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया आगामी 5 मार्च 2026 तक जारी रहेगी। इस बार प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का हाथ थामते हुए पूरे जिले में 'डिजिटल क्रॉप सर्वे' के मानकों को अनिवार्य कर दिया है, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार और देरी की शिकायतों पर भी लगाम लगेगी।

इस डिजिटल महाभियान के तहत राजस्व विभाग के कार्मिक सीधे खेतों की मेड़ पर पहुंचकर 'गिरदावरी ऐप' के माध्यम से वास्तविक फोटो अपलोड कर रहे हैं। हनुमानगढ़ जिले की भौगोलिक विशालता और करीब 30 लाख खसरों की भारी संख्या को देखते हुए राजस्व मंडल ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। गिरदावरी कार्य में तेजी लाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के उद्देश्य से स्थानीय युवाओं को बतौर 'सर्वेयर' नियुक्त करने की अनुमति प्रदान की गई है। इन युवाओं को प्रति खसरा 10 रुपए का मानदेय दिया जाएगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहायक सिद्ध होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रबी 2081 के सर्वेयरों का भुगतान हो चुका है और खरीफ 2082 के मानदेय की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

प्रभारी अधिकारी (भू-अभिलेख) श्री मांगी लाल ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करते हुए समस्त तहसीलदारों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा है कि किसानों को 'राज किसान गिरदावरी ऐप' के माध्यम से स्वयं गिरदावरी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। श्री मांगी लाल के अनुसार, जब किसान स्वयं अपने खेत का ऑनलाइन ब्यौरा दर्ज करेगा, तो पटवारी पर उसकी निर्भरता स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। किसानों की सहायता के लिए राजस्व मंडल अजमेर ने 'डिजिटल क्रॉप सर्वे राजस्थान' नाम से एक विशेष यूट्यूब चैनल भी शुरू किया है, जहाँ इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है।

इस डिजिटल गिरदावरी का सबसे बड़ा लाभ किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचते समय मिलेगा। ई-हस्ताक्षरित गिरदावरी के माध्यम से किसान सरकारी खरीद के पोर्टल पर सुगमता से पंजीकरण करा सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और लाभ सीधा किसान के खाते में पहुंचेगा। जिले का राजस्व विभाग इस समय पूरी मुस्तैदी के साथ इस लक्ष्य को हासिल करने में जुटा है ताकि हनुमानगढ़ का प्रत्येक किसान इस तकनीकी उन्नति का भागीदार बन सके।

Pratahkal Bureau

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