नोहर में पाले का तांडव: विधायक अमित चाचाण ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, विशेष गिरदावरी और मुआवजे की हुंकार
नोहर विधानसभा क्षेत्र में पाले से फसलों के भारी नुकसान पर विधायक अमित चाचाण ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग की है। सरसों, चना और गेहूं की फसलें शत-प्रतिशत बर्बाद होने से किसान गहरे आर्थिक संकट में हैं। विधायक ने राज्य आपदा राहत कोष से विशेष सहायता और पारदर्शी सर्वे की अपील की है।

नोहर। राजस्थान के नोहर विधानसभा क्षेत्र में कुदरत की दोहरी मार ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के साथ गिरे पाले ने लहलहाती फसलों को देखते ही देखते बर्बाद कर दिया है। इस गंभीर संकट को देखते हुए नोहर विधायक अमित चाचाण ने सक्रियता दिखाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक पत्र प्रेषित किया है। विधायक ने इस पत्र के माध्यम से क्षेत्र में हुए फसलों के व्यापक नुकसान की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल विशेष गिरदावरी करवाकर पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है।
विधायक अमित चाचाण ने अपने पत्र में क्षेत्र की व्यथा को बयां करते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों से अचानक पड़े भीषण पाले ने नोहर के गांवों में तबाही मचाई है। विशेष रूप से सरसों, चना, गेहूं, जौ, हरा चारा और विभिन्न सब्जियों की फसलें इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आकर पूरी तरह झुलस गई हैं। विधायक के अनुसार, क्षेत्र का किसान पहले से ही वर्षा की कमी और सिंचाई पानी की किल्लत से जूझ रहा था, ऐसे में पाले की मार ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। कई गांवों का दौरा करने और किसानों से संवाद करने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि पाले के कारण शत-प्रतिशत फसलें तबाह हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह डगमगा गई है।
विधायक चाचाण ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि यदि इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समय पर राहत नहीं मिली, तो वे कर्ज, खाद-बीज के खर्च और पारिवारिक दायित्वों के भारी दबाव में आकर गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को तत्काल विशेष गिरदावरी के आदेश दिए जाएं और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से वंचित या अपात्र किसानों को "राज्य आपदा राहत कोष" से विशेष सहायता प्रदान की जाए। इसके साथ ही, गिरदावरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया गया है ताकि वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो सके और राहत राशि सीधे पात्र किसानों तक पहुँच सके। अब क्षेत्र के हजारों किसानों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

Pratahkal Bureau
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