दलपतपुरा में बेटियों ने संभाली सत्ता: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर रूचिका और प्रिया बनीं स्कूल की 'प्रधानाचार्य'
दलपतपुरा के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अनोखी पहल! खेल और शिक्षा में अव्वल रूचिका सुथार और प्रिया को बनाया गया एक दिन का सांकेतिक प्रधानाचार्य। प्रधानाचार्य अरविन्द कस्वां की मौजूदगी में छात्राओं ने सीखा नेतृत्व और जिम्मेदारी का पाठ। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के संकल्प के साथ मनाया गया यह प्रेरक उत्सव, जिसने बेटियों के हौसलों को दी नई उड़ान।

=दलपतपुरा। आज के दौर में बेटियाँ केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नेतृत्व और कौशल की नई इबारत लिख रही हैं। इसी सशक्तिकरण की एक जीवंत तस्वीर शनिवार को राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, दलपतपुरा में देखने को मिली। राष्ट्रीय बालिका दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय प्रशासन ने एक अनूठी और प्रेरक पहल करते हुए विद्यालय की कमान अपनी होनहार छात्राओं के हाथों में सौंप दी। खेल के मैदान में अपनी चमक बिखेरने वाली कक्षा 12वीं की छात्रा रूचिका सुथार और शैक्षणिक क्षेत्र में अव्वल रहने वाली कक्षा 9वीं की छात्रा प्रिया को एक दिन के लिए 'सांकेतिक प्रधानाचार्य' नियुक्त कर उनके नेतृत्व कौशल का सम्मान किया गया।
समारोह का आगाज़ बालिकाओं के अधिकारों और उनके आत्मसम्मान के जयघोष के साथ हुआ। लगातार दो वर्षों से खेलकूद प्रतियोगिताओं में विद्यालय का नाम रोशन करने वाली रूचिका और मेधावी छात्रा प्रिया ने जब सांकेतिक रूप से प्रधानाचार्य की कुर्सी संभाली, तो पूरे परिसर में गर्व का माहौल था। विद्यालय की ओर से दोनों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत भी किया गया। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के भीतर जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और प्रशासनिक सूझबूझ की भावना को जागृत करना था।
इस गरिमामय कार्यक्रम के साक्षी विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अरविन्द कस्वां और उनकी सुपुत्री अर्पिता कस्वां रहे। कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के समर्पित स्टाफ सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें श्री अरविन्द सांखला, श्री राजेश चौधरी, श्री रामप्रसाद बिजारणियां, श्री बनवारी लाल स्वामी, श्री महेश कुमार पारीक, श्री प्रहलाद सिंह सहू, श्रीमती मीना रोघा, श्रीमती रीता रेनीवाल एवं श्रीमती मुक्ता कुमारी ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
प्रधानाचार्य श्री अरविन्द कस्वां ने छात्राओं को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बालिकाएँ समाज और राष्ट्र की वह सशक्त आधारशिला हैं, जिन पर भविष्य की भव्य इमारत टिकी है। उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की प्रासंगिकता पर बल देते हुए आह्वान किया कि बालिकाओं को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौर में छात्राओं ने भाषणों, कविताओं और गगनभेदी नारों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का संदेश प्रसारित किया। छात्राओं के विचारों में आत्मनिर्भरता की वह तड़प दिखी, जो साबित करती है कि यदि उन्हें उचित मंच मिले, तो वे आकाश की ऊंचाइयों को छू सकती हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया। दलपतपुरा के इस आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि जब बेटियों को अवसर मिलता है, तो वे न केवल जिम्मेदारी निभाती हैं बल्कि पूरे समाज का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

Pratahkal Bureau
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