हनुमानगढ़ में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क क्षारसूत्र चिकित्सा शिविर पाइल्स और भगंदर के रोगियों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। डॉ. पंकज पोटलिया और डॉ. हरवीर सांगवा जैसे विशेषज्ञों द्वारा अत्याधुनिक आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा से मरीजों का सफल उपचार किया जा रहा है। निःशुल्क ऑपरेशन, दवाएं और योग परामर्श के माध्यम से आयुर्वेद विभाग की यह पहल आमजन को गंभीर रोगों से बड़ी राहत प्रदान कर रही है।

हनुमानगढ़। चिकित्सा की प्राचीन भारतीय पद्धति जब आधुनिक समर्पण से मिलती है, तो वह असाध्य रोगों के लिए कालजयी समाधान बन जाती है। कुछ ऐसा ही दृश्य हनुमानगढ़ जंक्शन के दुर्गा मंदिर धर्मशाला में देखने को मिल रहा है, जहां राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क क्षारसूत्र अंतरंग शल्य चिकित्सा शिविर क्षेत्र के मरीजों के लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है। 1 जनवरी से शुरू हुआ यह शिविर आगामी 7 जनवरी, 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें पाइल्स (बवासीर) और भगंदर (फिस्टुला) जैसी कष्टकारी व्याधियों का जड़ से उपचार किया जा रहा है।

इस चिकित्सा महाकुंभ की कमान राजस्थान के विख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पंकज पोटलिया और डॉ. हरवीर सांगवा संभाल रहे हैं। बीकानेर से आई चिकित्सकों की यह अनुभवी टीम अपनी निपुणता के लिए जानी जाती है; गौरतलब है कि डॉ. पोटलिया के नेतृत्व में इससे पूर्व टोंक जिले में भी 134 मरीजों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें व्याधिमुक्त किया जा चुका है। शिविर के चौथे दिन स्थानीय जनप्रतिनिधि श्री प्रमोद डेलू और लायंस क्लब के सदस्यों ने आयोजन स्थल का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने उपचाररत मरीजों से आत्मीय संवाद कर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना और आयुर्वेद विभाग की इस जनकल्याणकारी पहल को सराहा। श्री डेलू ने रेखांकित किया कि ऐसे शिविरों का आयोजन समय की मांग है ताकि आमजन को बिना किसी आर्थिक बोझ के प्रभावी और सुरक्षित उपचार मिल सके।

आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. तीर्थ कुमार शर्मा ने शिविर की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहाँ केवल शल्य चिकित्सा ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा, विध्द कर्म और अग्नि कर्म पद्धति जैसी दुर्लभ विधाओं के माध्यम से भी उपचार किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप अधिक से अधिक लोगों को इस सुविधा का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। शिविर की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए शिविर प्रभारी डी.सी. सारस्वा ने स्पष्ट किया कि पंजीकृत रोगियों के लिए जांच, भोजन, ऑपरेशन और औषधियों से लेकर फॉलो-अप तक की तमाम सुविधाएं पूर्णतः निःशुल्क हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज अटूट विश्वास के साथ यहाँ पहुँच रहे हैं।

उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता का अनूठा संगम भी यहाँ देखने को मिल रहा है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रभारी डॉ. कुलदीप के मार्गदर्शन में मरीजों को न केवल नियमित योगासन कराए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें अंकुरित आहार और विशेष 'हुनजा टी' (हर्बल पेय) के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का महत्व भी समझाया जा रहा है। यह शिविर न केवल व्याधियों का उपचार कर रहा है, बल्कि आयुर्वेद की उस गौरवशाली परंपरा को भी पुनर्स्थापित कर रहा है जहाँ रोगी का उपचार समग्र रूप से किया जाता है। हनुमानगढ़ का यह आयोजन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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