प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के ऐतिहासिक अवसर पर प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव की महिमा का दिव्य श्लोक साझा किया। 'एक्स' पोस्ट के माध्यम से पीएम ने राष्ट्र के कल्याण की कामना करते हुए सौराष्ट्र की पवित्र धरा पर महादेव के अवतरण का आध्यात्मिक महत्व बताया। जानिए श्लोक का पूर्ण अर्थ और भारत की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस महापर्व की खास बातें।

history and significance of Somnath Swabhimaan Parv Gujarat : भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के अक्षुण्ण प्रतीक, प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव के सानिध्य में आज से 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का भव्य शुभारंभ हो गया है। आध्यात्मिक गलियारों में उस 'स्वाभिमान' की चर्चा तेज हो गई है, जिसने सदियों के संघर्ष के बाद भी भारत की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा है।

सौराष्ट्र की पवित्र धरा पर महादेव के अलौकिक अवतरण की महिमा का बखान करता है। श्लोक—"सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥"—का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि सौराष्ट्र प्रदेश के उस अत्यंत रमणीय और निर्मल स्थान पर, जहाँ स्वयं चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर आभूषण बनकर विराजमान हैं, भक्तों को अनन्य भक्ति का वरदान देने के लिए साक्षात ज्योतिर्मय सोमनाथ अवतरित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से सोमनाथ की उस शरण में जाने का आह्वान किया, जिसने इतिहास के भीषण झंझावातों और आक्रमणों को झेलते हुए भी अपनी आभा को कभी धूमिल नहीं होने दिया।


सोमनाथ मंदिर को बारह ज्योतिर्लिंगों में 'प्रथम' और 'अमरत्व का प्रतीक' माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार खंडित किए जाने के बाद भी हर बार अपने 'स्वाभिमान' के साथ पहले से अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ। वर्तमान में जारी 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' इसी अदम्य भावना और भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को समर्पित है। इस पहल ने न केवल नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृत विरासत से जोड़ा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक शक्ति का सशक्त संदेश भी दिया है। अब आईए जानते है इस श्लोक की पूरी व्याख्या और श्लोक ..

श्लोक की व्याख्या (Verse Explanation) :


"श्लोक:सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥"


व्याख्या:


  1. सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये : भगवान शिव का यह पावन धाम 'सौराष्ट्र' (गुजरात) के अत्यंत विशाल, निर्मल और सुंदर प्रदेश में स्थित है।
  2. ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् : महादेव स्वयं प्रकाशमान (ज्योतिर्मय) हैं और उनके मस्तक पर चंद्रमा की कला (चंद्रमा) एक मुकुट या आभूषण की तरह सुशोभित है।
  3. भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं : वे यहाँ केवल इसलिए अवतरित हुए हैं ताकि अपनी असीम कृपा से भक्तों को सच्ची भक्ति और मोक्ष प्रदान कर सकें।
  4. तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये : मैं उन परम दयालु भगवान श्री सोमनाथ महादेव की शरण ग्रहण करता हूँ।
Updated On 8 Jan 2026 1:26 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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