Ayodhya Ram Mandir donation scam 2026 : करोड़ों सनातनियों की आस्था के केंद्र अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की धनराशि में हुई कथित हेराफेरी और चोरी के मामले ने अब एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है. देश भर के श्रद्धालुओं को झकझोर देने वाले इस संवेदनशील मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ नामजद आरोपियों को आज भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच जिला एवं सत्र न्यायालय फैजाबाद में पेश किया गया. इस अदालती कार्रवाई के साथ ही इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक और बेहद गोपनीय रिपोर्ट लीक हो गई है, जिसने मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है. इस लीक रिपोर्ट के सामने आने के बाद से न केवल प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है.

इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन यादव की तहरीर पर अयोध्या कोतवाली में बकायदा एफआईआर दर्ज की गई. इस शिकायत के आधार पर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए धन की गणना करने वाली टीम के मुख्यियों और कर्मचारियों सहित सभी आठ आरोपियों को अपनी कस्टडी में ले लिया था. शुक्रवार को अदालत में पेशी से पहले पुलिस लाइन स्थित अस्पताल में सभी आरोपियों का कड़ा मेडिकल परीक्षण कराया गया. इसके बाद एसओजी प्रभारी की अगुवाई में आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) और सिविल जज जूनियर डिवीजन निवेदिता सिंह के समक्ष प्रस्तुत किया गया. मामले की अत्यधिक संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया था, जहां एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और सीओ सिटी श्रेयश त्रिपाठी खुद सुरक्षा कमान संभालते हुए नजर आए.

अदालती कार्यवाही के समानांतर लीक हुई एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट ने इस पूरी चोरी के पीछे की व्यवस्थागत खामियों को उजागर किया है. सूत्रों के अनुसार, इस गोपनीय रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मंदिर परिसर में चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया पूरी तरह से बेलगाम और अनियंत्रित थी. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वहां लागू सुरक्षा प्रोटोकॉल जमीनी स्तर पर शून्य थे और उन्हें केवल कागजी औपचारिकता के तौर पर निभाया जा रहा था. इसके अलावा, भेंट सामग्री के वर्गीकरण, हुंडियों (दानपात्रों) की संख्या और आधिकारिक अभिलेखों के मिलान में भारी विसंगतियां व कमियां पाई गईं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश के सबसे वीवीआईपी धार्मिक स्थलों में शुमार होने के बावजूद वहां पर्याप्त सीसीटीवी कवरेज नहीं था और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त पाई गई थी. एसआईटी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 तक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्टों के परीक्षण के आधार पर पर्यवेक्षणीय स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कई बड़े नामों पर कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति की है.

कानूनी मोर्चे पर इस समय अयोध्या पुलिस इन आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि इस पूरी घटना के 'मनी ट्रेल' को स्थापित किया जा सके. पुलिस सूत्रों का कहना है कि वर्तमान जांच शिकायतकर्ता की तहरीर पर केंद्रित है, लेकिन जैसे ही एसआईटी की मूल रिपोर्ट आधिकारिक रूप से पुलिस को सौंप दी जाएगी, इस जांच का दायरा काफी बढ़ जाएगा और इसमें कई अन्य प्रभावशाली चेहरे भी शामिल किए जा सकते हैं. दूसरी तरफ, एसआईटी की जांच में कुछ राहत भरी बातें भी सामने आई हैं. जांच दल ने पाया कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ खबरें पूरी तरह बेबुनियाद थीं; मिसाल के तौर पर अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई 38 किलोग्राम चांदी की ईंटों के गायब होने का दावा झूठा साबित हुआ है. रिकॉर्ड के अनुसार, यह चांदी तीर्थ क्षेत्र के अभिलेखों में दर्ज है और उसे सुरक्षित रूप से गलाकर बैंक लॉकर में जमा रखा गया है.

इस पवित्र स्थल पर हुई वित्तीय अनियमितता ने देश के राजनीतिक पारे को भी सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और सांसद संजय सिंह ने अयोध्या पहुंचकर इस मामले को लेकर सीधे केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को जेल भेजने की मांग की है. वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि बिना एफआईआर के एसआईटी 'बिना तीर की कमान' की तरह है और उन्होंने आरोपियों के देश से भागने की आशंका जताते हुए नेपाल बॉर्डर तक सील करने की मांग कर डाली है. इसके विपरीत, विश्व हिंदू परिषद (विएचपी) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति का समर्थन करते हुए निष्पक्ष और कड़ी कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. वीएचपी ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ट्रस्ट को अब किसी पेशेवर और सेवानिवृत्त अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर नियुक्त कर फुलप्रूफ तकनीकी प्लान बनाना चाहिए.

करोड़ों भक्तों की धार्मिक आस्था और समर्पण से जुड़े इस गंभीर मामले ने पूरे देश की नजरें अयोध्या पर टिका दी हैं. हालांकि सरकार और केंद्रीय मंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि भगवान राम की आस्था के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा, परंतु इस घटना ने बड़े धार्मिक न्यासों के पारदर्शी संचालन पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है. अब सभी की निगाहें अदालत के अगले रुख और पुलिस द्वारा खंगाले जा रहे मनी ट्रेल पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आस्था की आड़ में किए गए इस आपराधिक कृत्य की जड़ें कितनी गहरी हैं.

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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