प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव की महिमा का दिव्य श्लोक साझा किया। 'एक्स' पोस्ट के माध्यम से पीएम ने राष्ट्र के कल्याण की कामना की और सौराष्ट्र की पवित्र धरा पर महादेव के अवतरण का महत्व बताया। जानिए क्या है इस प्राचीन श्लोक का अर्थ और क्यों सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आज भारत की सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक है।

Somnath Swabhimaan Parv 2026 : भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक, प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव के दरबार में आज से 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का भव्य आगाज हो गया है। इस गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य संस्कृत श्लोक साझा कर पूरे देश को भक्ति के सूत्र में पिरो दिया। प्रधानमंत्री, जो सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, ने इस पोस्ट के जरिए भगवान सोमनाथ से समस्त मानवता के कल्याण और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। उनकी यह पोस्ट साझा होते ही आध्यात्मिक गलियारों में 'स्वाभिमान पर्व' की चर्चा तेज हो गई है, जो न केवल आस्था का उत्सव है, बल्कि भारत के पुनरुत्थान और सांस्कृतिक स्वाभिमान का जीवंत उदाहरण भी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी भावुक पोस्ट में द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र के उस पावन श्लोक का उल्लेख किया जो सौराष्ट्र की पवित्र धरा पर महादेव के अवतरण की महिमा गाता है। श्लोक—"सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥"—का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि सौराष्ट्र प्रदेश के उस अत्यंत रमणीय और निर्मल स्थान पर, जहाँ स्वयं चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर आभूषण बनकर विराजमान हैं, भक्तों को भक्ति का वरदान देने के लिए साक्षात ज्योतिर्मय सोमनाथ अवतरित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से सोमनाथ की उस शरण में जाने की बात कही, जिसने इतिहास के झंझावातों को झेलते हुए भी अपनी आभा को कभी धूमिल नहीं होने दिया।

इस विशेष आयोजन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सोमनाथ मंदिर भारत के उन बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम माना जाता है, जिसे 'अमरत्व का प्रतीक' कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार नष्ट किए जाने के बाद भी हर बार अपने 'स्वाभिमान' के साथ खड़ा हुआ। वर्तमान में जारी 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' इसी अदम्य भावना को समर्पित है, जिसके तहत मंदिर परिसर में विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस पहल ने न केवल युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृत विरासत से जोड़ा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक शक्ति का संदेश भी दिया है। यह पर्व और प्रधानमंत्री का यह आध्यात्मिक संदेश इस बात की पुष्टि करता है कि आधुनिक भारत अपने विकास के साथ-साथ अपनी विरासत को सहेजने के प्रति कितना संकल्पित है।

Updated On 8 Jan 2026 1:23 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story