“मेरी मौत के बाद यह वीडियो बाहर लाना”— संत मगननाथ की अंतिम इच्छा 10 वर्ष बाद पूरी, केसुली में दी गई समाधि
केसुली गाँव में चार दशक तक सेवा में जीवन बिताने वाले संत मगननाथ महाराज का निधन होते ही दस वर्ष पुरानी उनकी अंतिम इच्छा का वीडियो सार्वजनिक किया गया। वीडियो में बताए निर्देशों के अनुसार शिव मंदिर के सामने निर्धारित स्थान पर समाधि दी गई। गाँव में उनकी तपस्या, सेवा और आशीर्वाद को नई आध्यात्मिक विरासत माना जा रहा है।

नाथद्वारा। केसुली गाँव के श्मशानघाट स्थित शिव मंदिर में चार दशक से अधिक समय तक निरंतर सेवाकार्य में जुटे संत मगननाथ महाराज का बुधवार देर रात निधन हो गया। उनके देहांत के साथ ही एक रहस्यपूर्ण अध्याय भी खुला, जिसे महाराज ने स्वयं दस वर्ष पहले तैयार कर अपने भक्तों को सौंपा था। यह वही वीडियो था जिसमें उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा था कि इसे केवल उनके निधन के दिन ही आमजन के सामने लाया जाए।
महाराज की इच्छा अनुसार इस वीडियो को पिछले दस वर्षों से मोबाइल में सुरक्षित रखे हुए भक्तों ने बुधवार को ही सार्वजनिक किया। वीडियो सामने आते ही ग्रामवासियों ने संत की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए शिव मंदिर के सामने उसी स्थान पर समाधि देने का निर्णय लिया, जिसकी ओर स्वयं महाराज ने संकेत किया था। विधि-विधान से सम्पन्न इस अंतिम विदाई में किशन महाराज, गिर्राज पालीवाल, सत्यनारायण पालीवाल, भरत सिंह झाला, ललित जैन, मोतीलाल प्रजापत, देवीलाल प्रजापत, लालूलाल प्रजापत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
मगननाथ महाराज का जीवन सेवा, तपस्या और संघर्ष का संगम था। मुंबई के नालासोपारा में पानी बेचने से लेकर कांदिवली में ट्रक चलाने तक का उनका कठिन श्रमपूर्ण जीवन अंततः केसुली गाँव के श्मशानघाट में स्थायी सेवा को समर्पित हो गया। समाजसेवी उंकारलाल पालीवाल के आग्रह पर वे यहाँ आए और इसके बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह श्मशानघाट और मंदिर क्षेत्र के विकास में लगा दिया। चालीस वर्षों तक उन्होंने श्रमदान, वृक्षारोपण, पानी सेवा, मंदिर संरक्षण और आने-जाने वालों के सत्कार में अपना जीवन लगा दिया। वे पालीवाल परिवार द्वारा दिवंगत पुत्री दया की स्मृति में स्थापित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में रहते थे और प्रतिदिन सुबह चार बजे से सेवा का क्रम शुरू कर देते थे।
महाराज अपनी साधना में एक विशिष्ट परंपरा का पालन करते थे। समाधि प्रक्रिया में सहयोग करने वाले किशन सिंह महाराज ने बताया कि वे हमेशा अंतिम संस्कार की भस्म का तिलक लगाते थे, जिसे नाथपंथ में अत्यंत तपस्वी और शक्तिशाली माना जाता है। यह उनके योगी स्वभाव और श्मशान साधना की गहरी परंपरा का प्रतीक था।
गाँव में मान्यता है कि महाराज अक्सर कहते थे कि उनके निधन के बाद केसुली में शांति, समृद्धि और प्रगति आएगी और भविष्य में यहाँ एक श्रेष्ठ संत का आगमन होगा। ग्रामवासियों का विश्वास है कि उनका यह आशीर्वाद अब गाँव में नई ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन के रूप में प्रकट होगा।
इस प्रकार संत मगननाथ महाराज का जीवन, सेवा और आशीर्वाद केसुली में एक आध्यात्मिक विरासत के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
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