22वीं सदी का 'मैजिक'; जानें कैसे एक खिलौना बिल्ली ने 'डोरेमोन' को बनाया ग्लोबल आइकन
डोरेमोन का इतिहास: जानें 1969 में कैसे हुई दुनिया के सबसे चहेते रोबोटिक कैट की शुरुआत। हिरोशी फुजिमोतो और मोटू अबिको की उस जोड़ी का सच जिन्होंने नोबिता और डोरेमोन की कालजयी दोस्ती को जन्म दिया। 22वीं सदी के गैजेट्स से लेकर भारत में इसकी अपार लोकप्रियता तक, पढ़ें पूरी ऐतिहासिक रिपोर्ट।
Doraemon history : बचपन की सुनहरी यादों का जिक्र हो और नीले रंग के उस रोबोटिक कैट 'डोरेमोन' का नाम न आए, यह लगभग नामुमकिन है। आज से ठीक 56 साल पहले, दिसंबर 1969 में जापान की धरती पर एक ऐसी कहानी ने जन्म लिया, जिसने एनीमेशन की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। 'फूजिको एफ. फूजियो' (Fujiko F. Fujio) के साझा नाम से लिखने वाले दो महान कलाकारों—हिरोशी फुजिमोतो और मोटू अबिको—ने नोबिता और डोरेमोन के इस अटूट रिश्ते को कागजों पर उतारा था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे मशहूर रोबोटिक कैट एक 'दुर्घटना' और लेखक की 'क्रिएटिंग ब्लॉक' (सोच की कमी) का नतीजा था?
डोरेमोन के निर्माण की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। लेखक हिरोशी फुजिमोतो एक नया किरदार बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे और उनके पास कोई आइडिया नहीं था। तभी वे अपनी बेटी की एक खिलौना बिल्ली से टकरा गए और उसी समय उन्हें एक ऐसी बिल्ली का विचार आया जो भविष्य से आई हो और जिसके पास हर समस्या का जादुई समाधान हो। 3 सितंबर 2112 को जन्मा यह रोबोट (MS-903) असल में एक 'सब-स्टैंडर्ड' मॉडल था, जिसके कान चूहों ने काट लिए थे। इसी संघर्ष और मासूमियत ने उसे आम बच्चों के बेहद करीब ला दिया। 1969 में छह अलग-अलग पत्रिकाओं में एक साथ प्रकाशित होने के बाद, डोरेमोन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
आज डोरेमोन केवल एक कार्टून नहीं, बल्कि 30 से अधिक देशों में प्रसारित होने वाला एक सांस्कृतिक राजदूत है। भारत में 2005 में कदम रखने के बाद इसने न केवल टीआरपी के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि जापानी संस्कृति और तकनीक के प्रति भारतीय बच्चों में एक नई जिज्ञासा पैदा की। हालांकि, इसके गैजेट्स को लेकर कई बार कूटनीतिक और सामाजिक बहस भी हुई, लेकिन डोरेमोन और नोबिता की दोस्ती ने हमेशा यह संदेश दिया कि तकनीक से बड़ा 'आत्मविश्वास' और 'परिश्रम' है। 2026 में भी, डोरेमोन की जादुई पॉकेट और 'एनीवेयर डोर' (Anywhere Door) करोड़ों दिलों के लिए उम्मीद और कल्पना का सबसे बड़ा केंद्र बने हुए हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
