37 साल के ऐतिहासिक सफर के बाद, डोरेमोन का प्रसारण RCTI पर आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। 2005 में भारतीय घरों में जगह बनाने वाले इस शो ने पेरेंटिंग और बचपन के मायने बदल दिए थे। जानिए कैसे डोरेमोन ने 'बीडी' (Before Doraemon) और 'एडी' (After Doraemon) के रूप में एक पूरे युग को प्रभावित किया और क्यों यह विदाई हर प्रशंसक के लिए भावुक कर देने वाली है।

कार्टून की दुनिया से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने न केवल बच्चों बल्कि 90 और 2000 के दशक में बड़े हुए हर शख्स को भावुक कर दिया है। 2005 में जब नीले रंग के रोबोट 'डोरेमोन' ने भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों में दस्तक दी थी, तो शायद ही किसी ने सोचा था कि यह केवल एक शो नहीं, बल्कि एक जीवनशैली बन जाएगा। लेकिन आज, 37 साल के अविस्मरणीय सफर के बाद, डोरेमोन के प्रसारण ने RCTI (इंडोनेशियाई नेटवर्क) पर आधिकारिक रूप से अपना सफर समाप्त कर दिया है। यह खबर दुनिया भर के प्रशंसकों के लिए एक युग के अंत की तरह है।

'बीडी' और 'एडी' में बंटा बचपन: एक विश्लेषण इस शो का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि आधुनिक पेरेंटिंग और बचपन के इतिहास को अब दो कालखंडों में विभाजित किया जा सकता है: BD (Before Doraemon - डोरेमोन से पहले) और AD (After Doraemon - डोरेमोन के बाद)।

डोरेमोन के आगमन से पहले (BD), बच्चों के लिए होमवर्क एक अनिवार्य जिम्मेदारी थी, बहाने सीमित थे और साइकिल भी लंबी नसीहतों के बाद ही मिलती थी। लेकिन डोरेमोन के बाद (AD) का दौर पूरी तरह बदल गया। होमवर्क 'मेमोरी ब्रेड' के भरोसे पेंडिंग रहने लगा और स्कूल की देरी पर 'एनीवेयर डोर' (Anywhere Door) की कल्पना की जाने लगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह आया कि असफलता को देखने का नजरिया बदल गया—अगर नोबिता हर दिन फेल होकर भी खुश रह सकता है, तो असफलता 'ओके' है।

गैजेट्स का इंतजार और हल्का होता बचपन माता-पिता की चिंताएं जरूर बढ़ीं, लेकिन बच्चों का बचपन हल्का और रंगीन हो गया। बच्चे जादुई गैजेट्स का इंतजार करने लगे। आलोचकों ने अक्सर कहा कि डोरेमोन बच्चों को बिगाड़ रहा है, लेकिन गहराई से देखें तो उसने बच्चों को बिगाड़ा नहीं, बल्कि उनके बड़े होने की प्रक्रिया को कोमल (softened) बना दिया। इसने सिखाया कि जीवन में शॉर्टकट की चाह रखना सामान्य है, लेकिन अंततः दोस्तों और परिवार का साथ ही सबसे बड़ा जादू है।

एक अध्याय की समाप्ति RCTI पर इसके प्रसारण का बंद होना महज एक शो का खत्म होना नहीं है, बल्कि उस अध्याय का बंद होना है जिसने अनगिनत बचपन को आकार दिया। 37 वर्षों तक स्क्रीन्स पर राज करने के बाद, डोरेमोन का यह विदाई लेना एक भावनात्मक पल है। कानूनी और आधिकारिक तौर पर, चैनल ने इस लंबे सफर को विराम देने की घोषणा कर दी है, जिससे प्रशंसकों के बीच उदासी की लहर है।

डोरेमोन सिर्फ एक एनीमे नहीं था; वह उम्मीद, दोस्ती और कल्पना की एक ऐसी दुनिया थी जहां सब कुछ संभव था। भले ही टीवी पर इसका प्रसारण थम गया हो, लेकिन 'बैंबू कॉप्टर' की उड़ान और नोबिता-डोरेमोन की दोस्ती की यादें हमेशा हमारे जेहन में ताजा रहेंगी। अलविदा डोरेमोन, बचपन को इतना खास बनाने के लिए शुक्रिया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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