हकलाने की कमजोरी से लेकर बॉलीवुड के 'ग्रीक गॉड' बनने तक : जाने सुपरस्टार ऋतिक रोशन के संघर्ष की अनकही दास्तां
बॉलीवुड सुपरस्टार ऋतिक रोशन के 52वें जन्मदिन पर जानें उनके संघर्ष की प्रेरक कहानी। बचपन में हकलाने की समस्या से जूझने वाले ऋतिक ने कैसे अपनी कमजोरी को ताकत बनाया और 'कहो ना प्यार है' से लेकर 'सुपर 30' तक का शानदार सफर तय किया। 'ग्रीक गॉड' की फिटनेस, डांस और सुपरस्टारडम के पीछे छिपे कड़े परिश्रम और समर्पण की विशेष रिपोर्ट।

Hrithik Roshan's birthday : बॉलीवुड के 'ग्रीक गॉड' कहे जाने वाले ऋतिक रोशन का नाम आज विश्व स्तर पर अभिनय, नृत्य और फिटनेस के पर्याय के रूप में लिया जाता है। 10 जनवरी 2026 को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे ऋतिक की चमक-धमक भरी दुनिया के पीछे एक ऐसा कड़ा संघर्ष छिपा है, जो किसी भी व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। एक फिल्मी पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्म लेने के बावजूद, ऋतिक का बचपन उन सुविधाओं और सहजता से कोसों दूर था, जिसकी कल्पना अक्सर लोग करते हैं। बचपन में हकलाने की गंभीर समस्या (Stammering) के कारण ऋतिक का शुरुआती जीवन आत्मविश्वास की भारी कमी और सामाजिक उपहास के बीच बीता, जहाँ एक सामान्य वाक्य बोलना भी उनके लिए किसी हिमालय फतह करने जैसा कठिन कार्य था।
ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में दिग्गज निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन और पिंकी रोशन के घर हुआ था। विरासत में सिनेमा मिलने के बावजूद, हकलाने की समस्या ने उन्हें इतना अंतर्मुखी बना दिया था कि वे अक्सर खुद को बाथरूम या अलमारी में बंद कर लेते थे ताकि किसी को उनके बोलने की अक्षमता का पता न चले। हालाँकि, अपनी इस कमजोरी के आगे घुटने टेकने के बजाय, ऋतिक ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने वर्षों तक प्रतिदिन घंटों तक हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के समाचार पत्र बोल-बोलकर पढ़ने का कड़ा अभ्यास किया। शब्दों के उच्चारण पर नियंत्रण पाने के लिए की गई उनकी यह निरंतर साधना ही थी, जिसने उन्हें न केवल एक स्पष्ट वक्ता बनाया, बल्कि उनके भीतर उस अभिनेता को भी जगाया जो भविष्य में करोड़ों दिलों पर राज करने वाला था।
महज 10 वर्ष की आयु में रजनीकांत के साथ फिल्म 'भगवान दादा' में बाल कलाकार के रूप में नजर आने वाले ऋतिक ने साल 2000 में 'कहो ना... प्यार है' के जरिए जो धमाकेदार डेब्यू किया, उसने भारतीय सिनेमा के इतिहास में रातों-रात एक नया सुपरस्टार पैदा कर दिया। इस फिल्म की अभूतपूर्व सफलता ने उन्हें देश का पहला 'मिलेनियम सुपरस्टार' बना दिया। इसके बाद 'धूम 2', 'कृष' और 'जोधा अकबर' जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि वे केवल एक चॉकलेटी चेहरे और शानदार बॉडी वाले अभिनेता नहीं हैं, बल्कि एक मंझे हुए कलाकार भी हैं। 'सुपर 30' जैसी फिल्म में एक बिहारी शिक्षक की भूमिका को जीवंत कर उन्होंने अभिनय की उस गहराई को छुआ, जिसकी सराहना आलोचकों ने भी मुक्त कंठ से की।
आज ऋतिक रोशन का सफर केवल एक फिल्मी करियर नहीं, बल्कि मानवीय इच्छाशक्ति और धैर्य का एक जीवंत दस्तावेज है। निजी जीवन के उतार-चढ़ाव और शारीरिक चोटों के बावजूद, उन्होंने फिटनेस और समर्पण के जो मानक स्थापित किए हैं, उन्होंने सलमान खान के बाद युवाओं के बीच बॉडी बिल्डिंग और अनुशासन को एक नए स्तर पर पहुँचाया है। हकलाने वाले एक डरे हुए बच्चे से लेकर हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और सम्मानित कलाकारों में से एक बनने तक का उनका यह सफर यह संदेश देता है कि यदि लक्ष्य के प्रति लगन सच्ची हो, तो व्यक्ति अपनी सबसे बड़ी शारीरिक और मानसिक बाधाओं को भी सफलता की सीढ़ियों में बदल सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
