कश्मीर पर दिया करारा जवाब ; विवेक अग्निहोत्री ने क्यों ठुकराया ऑक्सफोर्ड का न्योता?
सिनेमाई और राजनीतिक हस्ती विवेक अग्निहोत्री ने ऑक्सफोर्ड में कश्मीर स्वतंत्रता पर बहस से इनकार किया। उन्होंने 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन और अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण को हवाला देते हुए भारत की संप्रभुता और शांति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताई।

विवेक अग्निहोत्री
सिनेमाई और राजनीतिक चर्चाओं में सक्रिय रहे विवेक अग्निहोत्री ने सितंबर 2024 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रस्तावित बहस ‘This House Believes in an Independent State of Kashmir’ में भाग लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने पत्र में इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता के खिलाफ बताया और 1990 के दशक में आतंकवादी हिंसा के चलते कश्मीर से लगभग 5 लाख हिंदू निवासियों के पलायन की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बहस को अनुचित करार दिया।
अग्निहोत्री ने पत्र में लिखा कि कश्मीर की राजनीतिक स्थिति और वहां की संवेदनशील सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बहस में भाग लेना न केवल संवेदनाओं के खिलाफ होगा, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और संवैधानिक स्थिरता पर भी सवाल उठाने जैसा होगा। उन्होंने विशेष रूप से 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण और 2023 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे संवैधानिक रूप से मान्यता देने का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का प्राथमिक लक्ष्य कश्मीर में शांति और स्थायित्व सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि बहस के मंच पर विवादों को बढ़ावा देना।
उनके इस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद कई हस्तियों और समर्थकों ने प्रशंसा व्यक्त की। बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन सहित कई जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक हस्तियों ने अग्निहोत्री के स्पष्ट रुख और कश्मीरी हिंदुओं की पीड़ा को रेखांकित करने वाले दृष्टिकोण की सराहना की।
हालांकि, विवेक अग्निहोत्री के इनकार के बावजूद बहस ऑक्सफोर्ड में आयोजित हुई और प्रस्ताव ‘कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य होना चाहिए’ को संकीर्ण मतों से पारित कर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार इस बहस का आयोजन और परिणाम वैश्विक मंच पर कश्मीर की स्थिति पर विचारों के व्यापक फैलाव को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि भारत के आंतरिक मामलों और संवैधानिक निर्णयों को अंतरराष्ट्रीय बहसों में लेकर जाना हमेशा विवादास्पद हो सकता है।
कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण से, अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण भारतीय संविधान की सर्वोच्चता और संसद की शक्ति के तहत किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2023 में इसे मान्यता देने के फैसले ने यह स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। विवेक अग्निहोत्री ने अपने पत्र में इस पहलू को प्रमुखता से उजागर किया और बहस से इनकार के पीछे मुख्य कारण के रूप में यही संवैधानिक तर्क प्रस्तुत किया।
इस घटना ने बहस और राजनीतिक मंचों पर संवेदनशील विषयों के प्रस्तुतीकरण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, यह भी दिखाता है कि सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय बहसों में भाग लेने या न लेने का निर्णय व्यक्तिगत, संवेदनशील और राष्ट्रीय हितों के समन्वय पर आधारित हो सकता है। विवेक अग्निहोत्री का यह रुख कश्मीर में हुई हिंसा और विस्थापन की पीड़ा को याद दिलाने के साथ-साथ भारत की संप्रभुता पर ध्यान केंद्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण संदेश बन गया।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
