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भारत-अमेरिका टकराव; ट्रंप क्यों भड़के मोदी सरकार से?
By EditorialPublished on 2 Sept 2025 5:30 AM IST
ट्रंप प्रशासन के टैरिफ दबाव और ट्रेड डील की धमकियों के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि रूस से तेल खरीद जारी रहेगी। इसी फैसले से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत पर निशाना साध रहे हैं।

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव और धमकियों के बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। ट्रंप टैरिफ की धमकी और लगातार दी जा रही चेतावनियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ मंच से दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी आर्थिक नीतियां स्वतंत्र रूप से तय करेगा।
भारत ने नहीं मानी ट्रंप की धमकी :
सोमवार (1 सितंबर 2025) को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही कार से द्विपक्षीय बैठक वाले होटल पहुंचे। यह संदेश था कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को किसी भी बाहरी दबाव में बदलने वाला नहीं है। भारत ने रूस से तेल खरीदने का सिलसिला जारी रखा है और अब तक किसी भी तरह का ट्रेड ऑफर अमेरिका को नहीं दिया है। यही वजह है कि ट्रंप टैरिफ के रूप में भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि यह फैसला पूरी तरह भारतीय जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
ट्रंप की नाराजगी और जापान-साउथ कोरिया का उदाहरण :
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को एकतरफा त्रासदी बताते हुए कहा कि भारत टैरिफ को घटाने को तैयार नहीं है। उन्होंने भारत की तुलना जापान और दक्षिण कोरिया से की और कहा कि ये दोनों देश भी अमेरिका पर ऊंचे टैरिफ लगाते हैं, लेकिन अंततः समझौता करने पर मजबूर हुए। ट्रंप का आरोप है कि भारत 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाकर अमेरिकी कंपनियों को रोक रहा है। खासकर डेयरी और कृषि क्षेत्र में अमेरिका भारत से एंट्री चाहता है, लेकिन मोदी सरकार ने किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है।
ट्रंप टैरिफ से बढ़ा तनाव :
भारत को झुकाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने जापान और साउथ कोरिया पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया और फिर भारत पर भी वही कार्रवाई की। इतना ही नहीं, रूस से तेल खरीद जारी रखने के बाद ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी ट्रंप टैरिफ लगा दिया। इसका सीधा संदेश यही था कि अगर भारत ने अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। लेकिन भारत ने दो टूक कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर ही फैसले करेगा।
एससीओ में दिखी नई धुरी :
एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने दुनिया को साफ संकेत दिया कि अब अमेरिका का दबाव असर नहीं करेगा। भारत ने यह संदेश भी दिया कि उसके पास ट्रेड और एनर्जी के कई विकल्प हैं और किसी एक देश पर निर्भरता की मजबूरी नहीं है। यही वजह है कि ट्रंप टैरिफ की धमकियां भारत पर असर नहीं डाल पा रही हैं।
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आत्मनिर्भर भारत का संकल्प :
भारत का साफ कहना है कि हम अपने लोगों की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए फैसले लेंगे। चाहे अमेरिका कितनी भी बार ट्रंप टैरिफ की धमकी क्यों न दे, भारत अपनी नीति पर कायम रहेगा। यही संदेश मोदी सरकार ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया है।

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