शासनश्री साध्वी कंचन‌प्रभा ने घाटकोपर में आचार्य तुलसी को श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 31 वर्ष पहले आज के दिन आचार्य तुलसी ने कहा था कि मुझे संत तुलसी कहे, आचार्य तुलसी नहीं, क्योंकि मैंने आचार्य पद का विसर्जन कर युवाचार्य महाप्रज्ञ को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर दिया हैl


Ghatkopar
मुंबई। शासनश्री साध्वी कंचन‌प्रभा ने घाटकोपर में आचार्य तुलसी को श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 31 वर्ष पहले आज के दिन आचार्य तुलसी ने कहा था कि मुझे संत तुलसी कहे, आचार्य तुलसी नहीं, क्योंकि मैंने आचार्य पद का विसर्जन कर युवाचार्य महाप्रज्ञ को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर दिया हैl परन्तु आचार्य महाप्रज्ञ ने निवेदन किया, नहीं गुरुदेव! हम आपका पाट महोत्सव विकास महोत्सव के रूप में मनाएंगे। यह है तेरापंथ धर्मसंघ का गौरवशाली इतिहास। शासनश्री साध्वी मंजूरेखा ने आचार्य तुलसी के बारे में बताते हुए कहा कि जो कुछ भी हम विकास देख रहे हैं उनकी देन है। आचार्य महाप्रज्ञ के विनय ने नये इतिहास को रचा। युवक परिषद्, महिला मंडल, साध्वी चेलनाश्री, उदितप्रभा, निर्भयप्रभा ने विचार व्यक्त किए। महिला मण्डल, युवक परिषद, ख्यालीलाल तातेड़, चन्द्रप्रकाश बोहरा, प्रकाश पोखरणा, राकेश बड़ाला, स्नेहलता पोखरणा तथा नरेन्द्र तातेड, हस्तीमल डांगी ने विचार प्रस्तुत किए। आभार ज्ञापन सभा मंत्री संजय सोनी ने किया।
Editorial

Editorial

Next Story