हमारी समुद्री यात्रा की तिथि नजदीक आ रही थी इसलिये उसकी तैयारिया शुरू कर दी। हम बर्फ के पहाड़ों और ग्लेशियरों पर जाने वाले थे जहां तापमान शून्य से भी कई डिग्री कम रहता है, जूते तो खरीद लिये थे, एक जाकेट भी बड़े भाई साहब का साथ लाया था मगर वहां की सदी के लिये पर्याप्त नहीं था, मुनीश के पास कई गर्म जेकेट थे, सिर्फ दो दिन के लिये नये जेकेटों पर भारी भरकम खर्चा करने की बजाय तो इन्हें ट्राइ करना ही बेहतर था।


Pratahkal - Suresh Goyal
Editorial

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