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टोरन्टो 2. भारत क्यूं नहीं पर्यटन के कृत्रिम स्थल पनपा कर पैसा कमाता ?
By EditorialPublished on 27 April 2023 5:30 AM IST
लाईन बहुत लम्बी थी और बहुत धीरे धीरे आगे बढ रही थी। लाईन में मेरी तरह कई वरिष्ठ स्त्री-पुरूष थे मगर कहीं कोई बैठने की व्यवस्था नहीं थी। खड़े ही पांव दुखने लगे थे मगर लाईन आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। बार तो मुझे लगा कि लाईन छोड़ कर नीचे जाकर बैठ जाऊं मगर फिर इतने भारी टिकिट के व्यर्थ जाने का खयाल आते ही यह विचार त्याग दिया जिस डेढ घंटे की प्रतीक्षा की बात हो रही थी वो कब का समाप्त हो चुका था फिर भी हमारा क्रम आने का नाम नहीं ले रहा था। लघु शंका का दबाव भी बढ़ता जा रहा था मगर उसकी भी कोई व्यवस्था नजर

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