जैसे भगवान ने मेरी सुन ली। घनघोर वर्षा के बीच एक हरी सी आकृति मेरी तरफ बढ़ती नजर आई। राजा ने हरा शर्ट पहना था। पहले भी एसी हरी आकृतियां नजर आई थीं, मैं खुश हो जाता था मगर पास आती तो ये आकृतियां किसी ओर की होती। मैं टकटकी लगाए उधर देखता रहा और कामना करता रहा कि इस बार तो राजा ही हो, मेरी खुशी का पारावार नहीं था जब यह आकृति राजा की ही निकली। तमाम आशंकाएं, अनिश्चितताएं जैसे पल भर में काफूर हो गई।


Suresh Goyal
Editorial

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