विमान में एक मोटी सी पारिचारिका ने हमारा स्वागत किया। पारिचारक भी एक दाढ़ी वाला प्रौढ़ ही था। हमारे यहां तो जब तक दुबली-पतली, गोरी-चिट्टी पारिचारिकाएं नहीं होती विमान सेवा को योग्य नहीं समझा जाता। एयर इण्डिया (Air India) की बारम्बार आलोचना का एक कारण यह भी होता है कि इसकी पारिचारिकाएं बूढ़ी, थूल थूल और प्रौढ़ होती है। पूरे विमान में ये दो ही सारा काम संभाल रहे थे। व्यवहार भी इनका मृदु व सौजन्यशील न होकर शुष्क व उदासीन सा था मगर वे काम दौड़ दौड़ कर कर रहे थे।


Suresh Goyal
विमान में एक मोटी सी पारिचारिका ने हमारा स्वागत किया। पारिचारक भी एक दाढ़ी वाला प्रौढ़ ही था। हमारे यहां तो जब तक दुबली-पतली, गोरी-चिट्टी पारिचारिकाएं नहीं होती विमान सेवा को योग्य नहीं समझा जाता। एयर इण्डिया (Air India) की बारम्बार आलोचना का एक कारण यह भी होता है कि इसकी पारिचारिकाएं बूढ़ी, थूल थूल और प्रौढ़ होती है। पूरे विमान में ये दो ही सारा काम संभाल रहे थे। व्यवहार भी इनका मृदु व सौजन्यशील न होकर शुष्क व उदासीन सा था मगर वे काम दौड़ दौड़ कर कर रहे थे।
घन्टे भर में ही हम बफेलो पहुँच गये। यहां से हमें कनाडा हेतु सीमा पार करनी थी। विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फाल बफेलो में ही हैं इसलिये यहां भारी संख्या में पर्यटकों का आना रहता है। कनाडा हम लोग कार से जाने वाले थे। अमेरिका में कारें किराये देने का व्यवसाय बहुत पनप चुका है। हर शहर में किसी भी जगह से आप कार किराये ले सकते हैं और खुद चलाकर कहीं भी जा सकते हैं। इसके लिये आपके पास वैध ड्राइविंग लाइसेन्स
(Driving license)
होना जरूरी होता है। ड्राइविंग लाइसेन्स भी एसा जिसमें आपको पुलिस के पोइन्टस न मिले हुए हों। यहां ट्राफिक उल्लंघन कर आप मामला खत्म करने जुर्माना जमा करा देते हो, और एसा लगातार दो तीन बार कर देते हो तो आपको पोइन्टस मिल जाते हैं। किसी भी व्यक्ति के लिये ये पोइन्टस मिलना खतरनाक होता है इसलिये सब इससे बचने की कोशिश करते हैं।
यही कारण है कि लोग 100-200 डालर का जुर्माना भरने की बजाय 1000-500 डालर वकील को देकर मुकदमा लड़ते हैं। मुकदमा 18 महीने तक टल जाता है तो चालान वैसे ही खारिज हो जाता है। बफेलो एयरपोर्ट भी बड़ा है। हर चन्द मिनटों में एक न एक उड़ान उतरती है जिसमें पर्यटकों के टोले के टोले आते हैं।
किराये पर कार हमने न्यूयार्क (New york) में ही बुक करा दी थी। अलग अलग मोडल की कारों के किराये अलग अलग थे। बढिया लक्जरी कारों या बड़ी बड़ी एस.यू.वी. कारों का किराया ज्यादा होता है। हम सिर्फ दो थे तो हमने होण्डा की छोटी कार फोकस चुनी। कार का फोटो तुरन्त कम्प्यूटर पर आ गया।
बफेलो के एयरपोर्ट टर्मिनल में ही कार रेन्टल कम्पनियों के ऑफिस हैं। हमने एविस कम्पनी की कार किराये पर ली थी। यहां 5-7 कम्पनियों के ओफिस
कतार से बने हुए थे, सब पर अच्छी भीड़ थी। हमने पैसे पहले ही चुका दिए इसलिये कार की चाबी ही लेनी थी। क्लर्क ने ड्राइविंग लाइसेन्स देख एक पर्ची बना कर दे दी थी। कार हमें समीप ही एक बड़ी सी बिल्डिंग से लेनी थी।
हम अपना सारा सामान लेकर उधर ही बढे। यहां भी अलग अलग कम्पनियों के काउन्टर बने थे। यह बहुत बड़ा पार्किंग क्षेत्र था जो कई मंजिला था। यहां कारों का लगातार आना जाना जारी था, कोई कार लेकर जा रहा था तो कोई वापस लाकर जमा करा रहा था। एविस के काउन्टर पर हमने पर्ची थमा दी। यहां हमें कुछ देर ठहरने को कहा गया और बताया गया कि हमारी कार साफ हो रही है। किराये पर देने से पहले ये कार को पेट्रोल से फुल टक करके देते थे। वापस जमा करा वक्त भी कार में फुल टेक पेट्रोल होना चाहिये था। यहां सभी कारें पेट्रोल की ही होती हैं, डीजल यहां पर पेट्रोल से भी मंहगा है। बड़ी बड़ी ट्रकें, ट्रेलर, टेंकर वगैरा डीजल से चलते हैं।
शीघ्र ही हमें कार मिल गई. लाल रंग की चमचमाती एकदम नई सिर्फ 300 मील ही अभी चली थी। यहां अभी भी मील ही चल रहा है, पेट्रोल भी लीटर की बजाय गेलन में ही भरा जाता है। कार के लिए हमने एक इजी वे स्टीकर भी खरीद लिया। इसके कारण किसी टोल टेक्स पर रूकने की जरूरत नहीं। इजी वे का एक अलग गेट होता है, उससे तुरन्त निकल जाओ। टोल का पैसा स्टीकर से अपने आप वसूल लिया जाता है। स्टिकर के हमें 4 डालर प्रति दिन के पैसे अग्रिम चुकाने पड़े।
कार में सामान लादा और निकल पड़े हम लगभग ढाई हजार कि.मी. के हाईवे पर्यटन पर। हम लोग विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फाल के बीच स्थित थे जिसके एक तरफ अमेरिका तो दूसरी तरफ कनाडा है, एक तरफ बफेलो शहर है तो दूसरी तरफ टोरन्टो शहर, एक तरफ न्यूयार्क स्टेट है तो दूसरी तरफ ओन्टेरियो स्टेट। यह विश्व की ताजा पानी की 5 प्रसिद्ध झीलों, जिन्हें ग्रेट लेक्स ओफ नोर्थ अमेरिका कहा जाता है, का एक अंश मात्र है। पांचों झीलें सुपीरियर, मिशीगन, रोन, ईरी व ओन्टेरियो एक दूसरे से जुड़ी हुई है। इनका क्षेत्रफल 2 लाख 41 जार वर्ग कि.मी. है तथा विश्व का 21 प्र.श. सतही ताजा पानी इनमें समाहित है। पृथ्वी पर ताजा पानी का सबसे बड़ा समूह है। इतनी बड़ी जलराशि के समूह को ने ही झीलें कहा जाता हो मगर यह एक तरह से भू समुद्र ही है क्यूंकि समुद्र की ही इनमें लहरें उठती हैं, तूफान आते हैं।
नियाग्रा प्रपात 167 फीट ऊंचा है जिससे औसतन 85 हजार क्यूसेक फीट पानी गिरता रहता है। यह पानी झील ओन्टेरियो में गिरता है जो झील ईरी से नियाग्रा नदी द्वारा लाया जाता है। सेन्ट लारेन्स नदी के द्वारा यह पानी ओन्टेरियो झील से अन्ध महासागर में विलिन हो जाता है।
अमेरिका व कनाडा को यह झील विभाजित करती है जिसे इसके उपर बना एक पुल जोड़ता है। कई लोग इस पुल को पैदल ही पार कर कनाडा में प्रवेश कर जाते हैं और घूम धाम कर वापस अमेरिका लौट आते हैं। कनाडा के वीजा नियम आसान होने के कारण कोई परेशानी नहीं होती। आजकल जिस तरह दुनिया भर में हालात बिगड़ रहे है इसलिये यहां भी नियम थोड़े सख्त हो गये हैं, मगर आपके पास वीजा है तो दिक्कत नहीं ।
पहले तो तुरन्त फुरन्त सीमा पर ही वीजा दे दिया जाता था मगर अब एसा नहीं। मुझे इसका ध्यान नहीं था इसलिये मैं कनाडा का वीजा बनवा ही नहीं रहा था, सोचा सीमा पर ही ले लेंगे मगर राजा से बात हुई तो उसने कहा एसी गलती मत करना, वीजा वहीं से बनवा कर लाना और मल्टीपल एन्ट्री का लाना जिससे एक से ज्यादा बार प्रवेश कर सकें।
वैसे अमेरिका (America) घूमने जाने वालों को भी मल्टीपल एन्ट्री वीजा ही लाना चाहिये क्यूंकि मान लो आप अमेरिका से एक दिन के लिये कनाडा चले गए तो वापस आपको अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके लिये मल्टीपल एन्ट्री वीजा जरूरी है। हम इस तरह की चोट खा चुके हैं। 1997 में अमेरिका घूमने आये थे। टूर लिया था उसमें बहामाज भी शामिल था, पूरा टूर वहां चला गया मगर हमें अमेरिका में ही रूकना पड़ा क्यूंकि हमारे पास मल्टीपल एन्ट्री का वीजा नहीं था।
हालांकि अमेरिका व कनाडा को ओन्टारियो झील का जल स्वाभाविक रूप से विभाजित करता है फिर भी दोनों देशों में बरसों से सीमा विवाद चल रहे हैं। दोनों देशों ने अपने अपने हिस्से में जमीन हथिया कर विवाद पैदा कर दिये हैं।
नियाग्रा प्रपात क्यूंकि अमेरिकी दिशा से गिरता है इसलिये अमेरिका की तरफ से इसे अच्छी तरह से नहीं देखा जा सकता। इस कारण अमेरिका पर्यटकों को नाव से झील में ले जाता है और पानी की जितनी सीमा अमेरिका में है वहां तक उस नाव को ले जा कर पर्यटकों को सामने से प्रपात के दर्शन कराता है। ये नावें। गिरते प्रपात के अन्दर भी जाती हैं। पर्यटकों को प्लास्टिक की बरसातियां दे दी जाती है फिर भी वे गीले हो ही जाते हैं। प्रपात में पानी इतनी तेजी से और इतने उपर से गिरता है इस कारण पानी की धुन्ध आकाश में उठती रहती है जो बहुत से दिखाई देती है। प्रपात के नीचे जाने वाली नावों का नाम भी मेड ओफ दी मिस्ट रखा गया है।
अमरीकी दिशा से प्रपात पहले ही देख चुके थे इस कारण हम इधर रूके ही नहीं और सीधे कनाडा की तरफ अग्रसर हुए। शीघ्र ही हम झील के उपर पुल के बीचों बीच पहुँच गये। हमारे पीछे अमेरिका था, आगे कनाड़ा।
Editorial

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