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न्यूयार्क - 3 | मुफ्त में बदनाम हो जाने की आशंका सताती रही
By EditorialPublished on 17 April 2023 5:30 AM IST
सिर्फ ट्रोली के 6 डोलर लगना तगड़ा झटका था। मन मसोसता हुआ आगे बढा तो दूर से ही अपना सामान नजर आ गया। मैंने अपनी अटेचियों के हेण्डल पर लच्छे की कई परतें बांध दी थी जिससे सामान की पहचान आसान हो जाती थी। अटेचियां मेरी नहीं थी, बहू मीतू की थी इसलिये पहचानता भी नहीं था, वैसे भी सब अटेचियां एक जैसी ही प्रतीत होती है इसलिये उनमें से अपनी छांटना मुश्किल कार्य होता है। आजकल हवाई अड्डों के बेल्ट पर अटेचियां उल्टी चलाई जाती हैं। इसलिये उनकी पहचान और भी मुश्किल हो जाती है। लच्छा कोई बांधता नहीं इसलिये मुझे आसानी रहती है।

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