वेन्कूवर Vancouver : अब पहाड़ पर चढ़ना ही बचा था। इतने ऊंचे ऊंचे पहाड़, बर्फ से ढके पहाड़ों को देखकर ही जान निकल रही थी में पहले ही काफी थक गया था, सोच रहा था कि कैसे चढ़ पाउंगा, मगर इन दोनों को यह बात बताने की हिम्मत नहीं हो रही थी। एक खयाल तो यह भी आ रहा था कि मैं नीचे ही रुक जाऊं मगर फिर सोचता कि मैं अकेला इतनी देर तक नीचे करूंगा क्या मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि पहाड़ों की चोटी तक केबल कारें व गण्डोला चलती हैं।


Yatra Vrutant-Suresh Goyal-Pratahkal-Rajasthan
Editorial

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