क्यों AIBE Exam के बिना ‘रद्दी’ है आपकी Law Degree? जानिए कौन और कैसे दे सकता है 'यह' वकालत की अग्नीपरीक्षा...
AIBE परीक्षा क्या है और भारत में वकालत करने के लिए यह क्यों अनिवार्य है? बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस परीक्षा की पात्रता, स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण के नियम और 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' (COP) के महत्व को विस्तार से जानें। समझिए कि कैसे एक लॉ ग्रेजुएट कोर्ट रूम में अपनी जगह पक्की करता है और इस परीक्षा के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या है।

काला कोट केवल एक परिधान नहीं, बल्कि न्याय की रक्षा का प्रतीक है। हालांकि, भारत में विधि (Law) की डिग्री हासिल कर लेने मात्र से ही किसी को कोर्ट में खड़े होकर बहस करने का अधिकार नहीं मिल जाता। लॉ कॉलेज से निकलने और कोर्ट रूम में 'माई लॉर्ड' कहने के बीच एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य बाधा खड़ी होती है, जिसका नाम है— 'ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन' (AIBE)। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित यह परीक्षा आज हर उस युवा के लिए एक निर्णायक मोड़ बन चुकी है, जो वकालत को अपना करियर बनाना चाहता है।
वैधता की कसौटी:
डिग्री बनाम प्रैक्टिस अक्सर देखा जाता है कि छात्र लॉ की डिग्री (LL.B) को ही अंतिम पड़ाव मान लेते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है। AIBE का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक वकील के पास वकालत करने के लिए बुनियादी कानूनी समझ और विश्लेषण क्षमता है या नहीं। यह परीक्षा लॉ ग्रेजुएट्स को 'एडवोकेट' के रूप में वैधता प्रदान करती है। आसान शब्दों में, इस परीक्षा को पास किए बिना कोई भी व्यक्ति भारत की अदालतों में स्थायी रूप से वकालत नहीं कर सकता। इसे उत्तीर्ण करने पर ही BCI द्वारा 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' (COP) जारी किया जाता है, जो एक वकील का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
परीक्षा का प्रारूप और 'बेयर एक्ट्स' की भूमिका AIBE एक पारम्परिक परीक्षा से हटकर है। यह एक ऑफलाइन (पेन और पेपर) परीक्षा है, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वरूप है— यह पूरी तरह से 'ओपन बुक' एग्जाम नहीं है, लेकिन इसमें परीक्षार्थियों को 'बेयर एक्ट्स' (Bare Acts) यानी बिना नोट्स वाली कानून की मूल किताबें ले जाने की अनुमति होती है। यह प्रावधान यह दर्शाता है कि बार काउंसिल रटने की क्षमता के बजाय कानून को खोजने और लागू करने की समझ को परखना चाहता है।
पात्रता और 'स्टेट बार काउंसिल' का पेंच इस परीक्षा में शामिल होने के लिए केवल लॉ की डिग्री होना काफी नहीं है। आवेदन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी पहलू 'पंजीकरण' है। AIBE का फॉर्म भरने से पहले उम्मीदवार को अपने संबंधित राज्य के बार काउंसिल (जैसे— बार काउंसिल ऑफ दिल्ली या महाराष्ट्र) में बतौर एडवोकेट पंजीकृत होना अनिवार्य है। राज्य बार काउंसिल से मिला 'प्रोविजनल एनरोलमेंट नंबर' ही इस राष्ट्रीय परीक्षा की चाबी है। इसके अलावा, आयु सीमा की कोई बाध्यता नहीं है और उम्मीदवार जितनी बार चाहे, यह परीक्षा दे सकता है, जो इसे एक समावेशी अवसर बनाता है।
डिजिटल आवेदन और भविष्य की राह
परीक्षा प्रक्रिया अब पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी हो गई है। आधिकारिक घोषणा के बाद उम्मीदवारों को वेबसाइट (allindiabarexamination.com) पर जाकर पंजीकरण करना होता है। इसमें व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और स्टेट बार का एनरोलमेंट नंबर दर्ज करना होता है। दस्तावेजों में फोटो, हस्ताक्षर और स्टेट बार का सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए शुल्क लगभग ₹3,500 तथा एससी/एसटी के लिए ₹2,500 निर्धारित रहता है।
ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली में गुणवत्ता बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम है। यह सुनिश्चित करता है कि जो भी व्यक्ति काले कोट में अदालत में प्रवेश करे, वह कानून की गरिमा और तकनीकी बारीकियों से भली-भांति परिचित हो। लॉ के छात्रों के लिए यह संदेश स्पष्ट है— डिग्री केवल शिक्षा का प्रमाण है, लेकिन AIBE वह मुहर है जो आपको 'वकील' बनाती है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
