Sonam Wangchuk hunger strike NEET 2026 : देश के लाखों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की साख से जुड़े नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 परीक्षा विवाद ने अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हुई कथित पेपर लीक, दोबारा परीक्षा के दौरान हुई अव्यवस्थाओं और इसके कारण हताश होकर छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर विरोध का मुख्य केंद्र बन गया है। इस पूरे छात्र आंदोलन को उस समय एक नई ताकत और राष्ट्रीय ध्यान मिला, जब प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक भी युवाओं के सुर में सुर मिलाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा बीते 20 जून से लगातार आयोजित किए जा रहे इस युवा विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर वांगचुक ने इस लड़ाई को सीधे तौर पर देश की प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ दिया है।

इस बड़े आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में आमूल-चूल बदलाव को लेकर है। विरोध स्थल पर एकत्र हुए सैकड़ों छात्र और युवा कार्यकर्ता परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक स्थाई परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए, पेपर लीक से प्रभावित हुए पीड़ित छात्रों को उचित मुआवजा दिया जाए और इस पूरी विफलता की जिम्मेदारी तय की जाए। इस प्रदर्शन के बीच सोनम वांगचुक का अनशन पर बैठना इस बात का प्रतीक है कि यह मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें देश की जवाबदेही और लद्दाख के अधिकारों के संरक्षण जैसे बड़े राष्ट्रीय सरोकार भी शामिल हो गए हैं।

कड़ाके की धूप और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद जंतर-मंतर पर डटे छात्रों को कई व्यावहारिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन स्थल पर प्रशासन द्वारा बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई जा रही हैं, जिनमें गंदे शौचालयों जैसी बुनियादी स्वच्छता की समस्याएं प्रमुख हैं। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और इंटरनेट के विभिन्न मंचों पर इस अनशन की प्रामाणिकता को लेकर तरह-तरह के सवाल और ऑनलाइन संदेह भी खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद जमीन पर छात्रों का हुजूम और सोनम वांगचुक का संकल्प डिगता हुआ नजर नहीं आ रहा है। दिन-ब-दिन प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले युवाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

प्रशासनिक और आधिकारिक मोर्चे पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का पुरजोर बचाव किया है। हालांकि उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा भी किया है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र और उनके नेता सरकार के इन आश्वासनों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक इस धांधली के लिए जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई थमेगी नहीं।

देश के इस सबसे बड़े छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक के इस आमरण अनशन ने भारत की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यह विवाद अब केवल एक परीक्षा के नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों परिवारों की उम्मीदों, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सरकारी तंत्र पर उनके भरोसे की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। जंतर-मंतर से उठी यह गूंज आने वाले दिनों में भारतीय शिक्षा नीति और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होने वाली है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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