डूंगरपुर में पारिवारिक विवाद के चलते जेठ ने बहू बबली देवी पर लोहे की रॉड से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया, आरोपी वासू फिलहाल फरार है। वहीं, एसबीपी कॉलेज में इंटरनल परीक्षा से वंचित छात्रों ने तुषार परमार के नेतृत्व में जमकर प्रदर्शन किया। प्रशासन ने दो दिन में दोबारा परीक्षा कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर जिले में बीते कुछ घंटों के भीतर हिंसा और जन-आक्रोश की दो बड़ी घटनाएं सामने आईं, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। पहली घटना रामसागड़ा थाना क्षेत्र के गामड़ी अहाड़ा धमलात फला गांव की है, जहाँ पारिवारिक विवाद की आग ने हिंसक रूप ले लिया। यहाँ एक घर की दहलीज पर घरेलू कामकाज में जुटी बबली देवी पर उनके ही सगे जेठ वासू ने लोहे की रॉड से प्राणघातक हमला कर दिया। जिस समय यह वारदात हुई, बबली देवी के पति मांगीलाल रोत ट्रैक्टर लेकर काम पर गए हुए थे। अचानक हुए इस वार से बबली देवी का सिर फट गया और वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ीं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वासू मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और घायल महिला को तत्काल डूंगरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश के लिए दबिश देना शुरू कर दिया है।

दूसरी ओर, डूंगरपुर के शिक्षा जगत में उस समय भारी तनाव देखा गया जब एसबीपी कॉलेज के गेट पर सैकड़ों छात्रों ने ताला जड़कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस धरने का नेतृत्व छात्रसंघ अध्यक्ष तुषार परमार कर रहे थे। प्रदर्शन का मुख्य कारण कॉलेज प्रशासन द्वारा आयोजित इंटरनल परीक्षाओं से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का वंचित रह जाना था। तुषार परमार का तर्क था कि क्षेत्र के अधिकांश छात्र आर्थिक तंगी के कारण मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे, जिसके चलते उन्हें परीक्षा की समय पर सूचना नहीं मिल सकी। हालांकि, कॉलेज प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि परीक्षाएं 4 दिसंबर से ही सुचारू रूप से चल रही थीं और इसकी विधिवत सूचना भी दी गई थी। घंटों चले इस गतिरोध और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ हुई नारेबाजी के बाद आखिरकार प्रबंधन को झुकना पड़ा। प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद यह सहमति बनी कि वंचित छात्रों के लिए आगामी दो दिनों के भीतर पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद ही छात्रों ने अपना धरना समाप्त किया।

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