डूंगरपुर में भागवत कथा के दसवें अध्याय में रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह के मंगल गीत ने शहर को गूंजित कर दिया। आचार्य दीपेन व्यास ने गोपी गीत, भ्रमर गीत और उद्धव प्रसंग का वर्णन किया। रुक्मिणी और कृष्ण का प्रेम विवाह आज भी आदर्श प्रेम का प्रतीक है।

डूंगरपुर। भागवत कथा का दसवां अध्याय, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनके स्वर्गवास तक की लीलाओं का वर्णन है, शहरवासियों के बीच गहरी आध्यात्मिक अनुभूति छोड़ गया। शहर के गेप सागर की पाल पर आयोजित भागवत कथा के छठे दिन, रुक्मिणी और श्रीकृष्ण के विवाह के प्रसंग में श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाकर कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। कथा का सचित्र वर्णन और नृत्य के माध्यम से कृष्ण और रुक्मिणी बने पात्रों का जीवन जीवंत हो उठा।

व्यवस्थित कार्यक्रम का संचालन व्यास पीठ के आचार्य दीपेन व्यास ने किया। आचार्य व्यास ने गोपी गीत, भ्रमर गीत, उद्धव प्रसंग और रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गोपियों का अहंकार — यह मानना कि उनकी सुंदरता और मधुरता के कारण कृष्ण उनके वश में हैं — नष्ट करने के लिए जब कृष्ण अंतर्धान हुए, तो गोपियों ने गोपी गीत गाए। आचार्य व्यास ने बताया कि दसवां अध्याय श्रीकृष्ण के बचपन की लीलाओं से परिपूर्ण है, जिसमें मथुरा में उनका आगमन, कंस का वध, द्वारका में निवास और रुक्मिणी का अपहरण शामिल हैं।

रुक्मिणी का विवाह भागवत कथा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंडित व्यास ने बताया कि रुक्मिणी का रिश्ता शिशुपाल से तय हो गया था, लेकिन वह इस विवाह के लिए अनिच्छुक थी। उसने अपने प्रेम का इज़हार करते हुए एक पत्र श्रीकृष्ण को भेजा और उनसे अनुरोध किया कि विवाह से पूर्व निर्दिष्ट मंदिर में आकर उसे अपने साथ ले जाएं। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी की इस इच्छा का सम्मान किया और विवाह संपन्न हुआ। यह विवाह शुद्ध प्रेम पर आधारित था और परंपरागत दांव-पेंच से परे था।

आचार्य व्यास ने वर्तमान समय के प्रेम विवाहों की तुलना करते हुए कहा कि अक्सर माता-पिता और परिवार की अनिच्छा के बावजूद भावनाओं में बहकर किए गए विवाहों में समय के साथ मतभेद उत्पन्न हो जाते हैं और अधिकतर विवाह असफल हो जाते हैं। जबकि रुक्मिणी और श्रीकृष्ण का विवाह आदर्श प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक था।

इस कार्यक्रम में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभु पंडया, राजाजी छतरी के महंत, घनश्याम शाह, रमेश वरयानी, रेखा कलाल, भूपेश शर्मा, जयेश कंसारा सहित श्रीनाथ महिला मंडल की सदस्य और अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भागवत कथा के इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया बल्कि रुक्मिणी-श्रीकृष्ण के प्रेम और त्याग की प्रेरक कथा को जीवंत रूप में सामने लाया।

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