तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के बाहर अतिक्रमण पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के पीछे सरकारी जमीन, वक्फ दावे और दशकों पुराने दस्तावेज़ों की जांच है। हाईकोर्ट के निर्देश और L&DO-DDA की रिपोर्ट के आधार पर 0.195 एकड़ से बाहर का निर्माण अवैध पाया गया

Turkman Gate controversy : दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद और उससे सटी जमीन को लेकर उठा विवाद अब केवल एक स्थानीय अतिक्रमण का मामला नहीं रह गया है। यह मामला सरकारी जमीन के स्वामित्व, वक्फ बोर्ड के दावों, दशकों पुराने दस्तावेज़ों और न्यायिक प्रक्रिया के जटिल मेल का उदाहरण बन चुका है। हालिया प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन ने इस विवाद को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई, जब ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नामक संस्था ने सरकार से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि तुर्कमान गेट स्थित रमलीला ग्राउंड की सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया गया है और इस भूमि का इस्तेमाल शादी-बारात घर, पार्किंग स्थल तथा निजी क्लिनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर के रूप में किया जा रहा है। शिकायत सामने आने के बाद केंद्र सरकार से जुड़े भूमि और शहरी विकास से संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू की।

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम (MCD) ने संयुक्त सर्वे कराया। इस सर्वे में सामने आया कि करीब 2,512 वर्ग फुट क्षेत्र में सीधा अतिक्रमण किया गया है, जबकि रमलीला ग्राउंड की कुल 36,428 वर्ग फुट सरकारी जमीन पर विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाई गईं। सर्वे रिपोर्ट में शादी स्थल, पार्किंग और निजी मेडिकल सेंटर के संचालन की पुष्टि की गई।

जमीन के स्वामित्व को लेकर सरकार ने 1952 से 1972 तक के रिकॉर्ड खंगाले। DDA और L&DO की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित जमीन भारत सरकार के स्वामित्व में है और L&DO के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। जांच के दौरान वक्फ बोर्ड के नाम जमीन के किसी भी प्रकार के ट्रांसफर या अलॉटमेंट का कोई प्रमाण नहीं मिला। इन निष्कर्षों के आधार पर ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि अतिक्रमण अवैध पाया जाता है तो उसे हटाया जाए। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को तीन महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई से पहले सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

पहली सुनवाई के दौरान मस्जिद प्रबंधन ने दावा किया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद सौ साल से अधिक पुरानी है और वक्फ संपत्ति है। प्रबंधन ने बारात घर के संचालन से इनकार करते हुए कहा कि खाली स्थान का कभी-कभार विवाह समारोहों के लिए उपयोग किया जाता है। उन्होंने उस क्षेत्र को कब्रिस्तान बताए जाने का भी दावा किया। वहीं, DDA और L&DO ने अदालत के समक्ष दोहराया कि जमीन हमेशा भारत सरकार की रही है और वक्फ बोर्ड के नाम कोई वैध मालिकाना दस्तावेज़ मौजूद नहीं है।

दूसरी सुनवाई में वक्फ बोर्ड ने 1970 की गजट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए मस्जिद का उल्लेख होने का दावा किया, हालांकि जमीन की सटीक सीमाओं को लेकर कोई स्पष्ट दस्तावेज़ पेश नहीं किया जा सका। इसके विपरीत, L&DO ने 15 फरवरी 1940 की लीज डीड को महत्वपूर्ण सबूत के रूप में प्रस्तुत किया। इस लीज के अनुसार केवल 0.195 एकड़ जमीन ही वैध रूप से आवंटित थी, और इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की लीज या अलॉटमेंट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

सभी पक्षों की सुनवाई और दस्तावेज़ी जांच के बाद नगर निगम ने अपना अंतिम आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि 0.195 एकड़ से अधिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अधिकार सिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए शेष जमीन भारत सरकार के स्वामित्व में मानी जाएगी। इस सरकारी जमीन पर मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान के अलावा शादी स्थल, पार्किंग, क्लिनिक या किसी भी प्रकार की आय-उत्पादक गतिविधि की अनुमति नहीं है। इसी आधार पर 0.195 एकड़ से बाहर बनी संरचनाओं को अतिक्रमण मानते हुए हटाने की कार्रवाई की गई।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले में फैज-ए-इलाही मस्जिद को अवैध घोषित नहीं किया गया है। 0.195 एकड़ भूमि पर स्थित संरचना को वैध माना गया है, जबकि इसके बाहर किया गया निर्माण ही अवैध ठहराया गया है। यह मामला न केवल दिल्ली में सरकारी जमीन के संरक्षण से जुड़ा है, बल्कि भविष्य में वक्फ और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े विवादों के लिए भी एक अहम कानूनी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story