गुवाहाटी से हावड़ा के बीच दौड़ेगी देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रेल मंत्री ने किया नए युग का शंखनाद
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी में इस सेवा का शुभारंभ करेंगे। 180 किमी/घंटा की रफ्तार, 16 कोच और पारंपरिक व्यंजनों के साथ यह ट्रेन हवाई यात्रा से कम किराये में लग्जरी सफर प्रदान करेगी। यह असम और बंगाल के बीच कनेक्टिविटी का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय है।

मालीगांव/नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल यात्रियों के रात्रिकालीन सफर को विश्वस्तरीय सुखद अहसास में बदलने के लिए देश की पहली 'वंदे भारत स्लीपर' ट्रेन पटरी पर उतरने को तैयार है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह घोषणा की कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पहली सेवा असम के कामाख्या (गुवाहाटी) और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच शुरू की जाएगी। मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के महीने में इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो पूर्वोत्तर भारत और बंगाल के बीच कनेक्टिविटी की एक नई इबारत लिखेगा।
यह ट्रेन मात्र एक वाहन नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ट्रेन के सभी आवश्यक ट्रायल, कठोर टेस्टिंग और सुरक्षा सर्टिफिकेशन की प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं। 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार भरने की क्षमता रखने वाली यह सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा को कम समय में और अधिक आरामदायक बनाएगी। रेलवे का यह कदम आधुनिकता और गति के उस मेल को प्रदर्शित करता है, जिसका सपना दशकों से देखा जा रहा था। मंत्री ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2026 भारतीय रेलवे के लिए व्यापक सुधारों का वर्ष होगा, जिसमें यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता के शीर्ष पर रखा गया है।
सफर के अनुभव को यादगार बनाने के लिए इसके इंटीरियर को बेहद एर्गोनॉमिक और सुरक्षित बनाया गया है। इस ट्रेन की एक विशेष खासियत इसका खान-पान होगा, जहाँ यात्रियों को उनकी संस्कृति से जोड़ने के लिए पारंपरिक असमिया और बंगाली व्यंजनों का स्वाद परोसा जाएगा। किराये के मोर्चे पर भी सरकार ने आम आदमी का विशेष ध्यान रखा है; अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि वंदे भारत स्लीपर का किराया हवाई यात्रा की तुलना में काफी कम होगा और इसमें भोजन की लागत भी शामिल होगी, जिससे यह एक 'वैल्यू-फॉर-मनी' विकल्प बनकर उभरेगा। तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ यह ट्रेन सांस्कृतिक सेतु का भी कार्य करेगी।
तकनीकी संरचना की बात करें तो 16 कोच वाले इस रैक में कुल 823 यात्रियों के सफर करने की व्यवस्था है। इसमें यात्रियों की सुविधा के अनुसार 11 एसी 3-टियर कोच, 4 एसी 2-टियर कोच और एक आलीशान फर्स्ट एसी कोच शामिल किया गया है। यह सेवा न केवल दो महानगरों को जोड़ेगी, बल्कि असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन और बंगाईगांव सहित पश्चिम बंगाल के कोचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्द्धमान और हुगली जैसे महत्वपूर्ण जिलों के विकास को भी नई गति प्रदान करेगी। यह पहल न केवल क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि पर्यटन और सामाजिक संबंधों को भी प्रगाढ़ करेगी, जो अंततः भारतीय रेलवे के एक नए और सशक्त स्वरूप को विश्व पटल पर अंकित करेगी।

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