Jama Masjid survey : दिल्ली हाई कोर्ट ने शाही जामा मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण और MCD पार्कों में हुए अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने 2 महीने के भीतर विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। जानिए क्या है पूरी जनहित याचिका, किन गेटों पर है अवैध कब्जा और ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन का अगला कदम क्या होगा।

Jama Masjid survey : देश की राजधानी की ऐतिहासिक पहचान और मुगलकालीन वास्तुकला का बेजोड़ नमूना, शाही जामा मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसकी भव्यता नहीं बल्कि इसके आसपास पसरा अवैध अतिक्रमण है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जामा मस्जिद के निकटवर्ती क्षेत्रों और नगर निगम (MCD) के पार्कों में व्याप्त अवैध अतिक्रमण के खिलाफ निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि जामा मस्जिद के आसपास की सार्वजनिक संपत्तियों का विस्तृत सर्वे किया जाए, जिससे दशकों से जमे अवैध कब्जेदारों और अनधिकृत निर्माणों पर कानून का चाबुक चलना तय माना जा रहा है।

अदालत की यह तल्ख टिप्पणी और सख्त निर्देश फरहत हसन नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आए। याचिकाकर्ता ने दिल्ली के दिल में स्थित इस धरोहर की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कोर्ट को बताया कि किस तरह मस्जिद के गेट नंबर 3, 5 और 7 के सामने अवैध पार्किंग का जाल बिछा हुआ है। इतना ही नहीं, मस्जिद के आसपास के सार्वजनिक मार्गों और पार्कों को अवैध फेरीवालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने अपनी जागीर बना लिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एमसीडी को दो महीने की समयसीमा दी है, जिसके भीतर सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी अनिवार्य होगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि सर्वे में कोई भी निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो कानून के तहत बिना किसी रियायत के तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इस कानूनी आदेश का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जामा मस्जिद केवल एक इबादतगाह नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन का केंद्र भी है। 1650 में मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा निर्मित यह मस्जिद, जो लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर की नक्काशी के लिए जानी जाती है, आज अतिक्रमण के बोझ तले दबी नजर आती है। याचिका में उन व्यावसायिक गतिविधियों पर भी तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है जो इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा और सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। अब सबकी नजरें दो महीने बाद पेश होने वाली सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पुरानी दिल्ली की इन गलियों में कानून का राज किस तरह बहाल होता है और क्या जामा मस्जिद अपनी खोई हुई सुव्यवस्था और भव्यता को दोबारा प्राप्त कर पाएगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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