डीग के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में गूंजे भक्ति के स्वर, महिला मंडल ने श्रद्धाभाव से किया पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन
डीग के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में महिला मंडल द्वारा भव्य 'पौष बड़ा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर के सानिध्य में आयोजित इस उत्सव में मातृशक्ति ने भजनों के साथ ठाकुरजी की सेवा की। भीषण सर्दी में भगवान को गर्म तासीर के पकवानों का भोग लगाने की इस पारंपरिक रस्म में नगर की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

डीग, 5 जनवरी। राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी डीग के सुप्रसिद्ध और प्राचीन लक्ष्मण मंदिर में शनिवार की शाम भक्ति और सेवा के अनूठे संगम की साक्षी बनी। कड़ाके की ठंड और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच मंदिर परिसर में महिला मंडल द्वारा भव्य 'पौष बड़ा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने समूचे वातावरण को धर्ममय कर दिया। मंदिर के महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर के पावन सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सायंकाल 7 बजे हुआ, जहाँ मंदिर का जगमोहन मातृशक्ति के मधुर भजनों और कीर्तनों से गुंजायमान हो उठा। ढोलक की थाप और मंजीरों की झंकार के बीच महिलाओं ने ठाकुरजी की महिमा का गुणगान किया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
इस धार्मिक उत्सव की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मंदिर महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर ने शास्त्रोक्त परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पौष मास में बढ़ती हुई भीषण शीत लहर को देखते हुए मंदिर की सेवा पद्धति में विशेष परिवर्तन किए जाते हैं। ठाकुरजी को शीत से बचाने के लिए उन्हें गुनगुने जल और सुगंधित इत्र से स्नान कराया जाता है, साथ ही उन्हें ऊनी और गर्म वस्त्र धारण कराए जाते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस माह में भगवान के भोग का स्वरूप भी बदल जाता है और उनकी आरोग्यता के लिए गर्म तासीर वाले पकवानों का विशेष नैवेद्य अर्पित किया जाता है, जिसे 'पौष बड़ा' के रूप में जाना जाता है।
भक्ति और श्रद्धा के इस महाकुंभ में मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर बृज लता गांधी, सरोज झालानी, स्नेहलता तमोलिया, अंजू गोयल, सुनिता सौखिया, पूजा खण्डेलवाल, मुन्नी गुर्जर और लक्ष्मी सौनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में भगवान को गर्म पकवानों का भोग लगाकर उपस्थित जनसमूह में प्रसादी वितरित की गई। कड़ाके की सर्दी में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि सामुदायिक सौहार्द और भक्ति की अटूट डोर को और अधिक सुदृढ़ किया। यह आयोजन डीग की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं के प्रति जनमानस की गहरी आस्था का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा।

Pratahkal Newsroom
PratahkalNewsroom is the editorial team of Pratahkal News, dedicated to delivering accurate, timely, and unbiased news. Our newsroom focuses on verified reporting, in-depth analysis, and responsible journalism across politics, society, economy, and national affairs.
