भागवताचार्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने परीक्षित-शुकदेव संवाद के माध्यम से श्रद्धालुओं को कलयुग में श्रवण और भक्ति का आध्यात्मिक महत्व समझाया।

डीग 23 फरवरी। शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर प्रांगण में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस का विवरण निम्नलिखित है:


कथा का मुख्य प्रसंग और आध्यात्मिक महत्व

भागवताचार्य पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की कथा, परीक्षित-शुकदेव संवाद और वराह अवतार का वर्णन किया। पाराशर ने कहा कि:

"श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने से मन शांत होता है। इसी के साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है और जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।"

कलियुग में भागवत की महिमा

  • जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है।
  • सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है।
  • कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।

श्रीकृष्ण और पुराण का परिचय

पाराशर ने कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है।


कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति

इस मौके पर निम्नलिखित श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक मौजूद थे:

  • धनीराम गुजरात वाले, केदार सौखिया
  • हरिओम पाराशर, देवेंद्र बंसल
  • सुरेश तुल्ला, ममता बंसल
  • सुनिता सौखिया, गीता तमोलिया
  • बृज लता गांधी
Pratahkal Newsroom

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