बाबा शिवराम दास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय कथा के प्रथम दिन भागवताचार्य ने भागवत शब्द की दिव्य व्याख्या कर श्रवण का आध्यात्मिक महत्व समझाया।

डीग 22 फरवरी। ज्ञान, वैराग्य, भक्ति और त्याग के माध्यम से परम तत्व ईश्वर की प्राप्ति कराए वह भागवत है, भगवान के गुण, लीला और दिव्य मार्ग आत्मा को पवित्र करता है। यह वाक्य साकेतवासी बाबा राममनोहर दास जी महाराज पान्हौरी वाले द्वारा प्रारंभ की गई एवं उन्ही के शिष्य बाबा शिवराम दास जी महाराज के सानिध्य में शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर पर आयोजित हो रही सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान प्रथम दिवस भागवताचार्य पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहे।


भागवत शब्द की दिव्य व्याख्या

भागवताचार्य ने कहा कि भागवत चार अक्षरों से बना है:

  • भ: "भक्ति ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण"
  • ग: "ज्ञान भगवान के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान"
  • व: "वैराग्य सांसारिक मोह-माया से विरक्ति"
  • त: "तत्व/त्याग परम तत्व परमात्मा की प्राप्ति"

कथा श्रवण का आध्यात्मिक महत्व

पूज्य पाराशर जी ने कथा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि:

"भागवत कथा स्वयं भगवान की अनुभूति के समान है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से मन पवित्र, शांत और निर्मल होता है, जिससे आत्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और ईश्वर के प्रति प्रेम-भक्ति जागृत होती है। यह कथा पापों का नाश करती है, सात जन्मों के पुण्य संचित करती है, तथा मृत्यु के भय को दूर कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का मार्ग दिखाती है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में भागवत अवश्य सुननी चाहिए। क्योंकि यह कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को भगवान से जोड़ने का माध्यम है, जो मनुष्य को सही दिशा में जीवन जीने की प्रेरणा देती है।"

श्रीमद्भागवत कथा सुनना मन को शुद्ध करने, ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत करने और मोक्ष प्राप्त करने का एक दिव्य साधन है। इसका मुख्य उद्देश्य जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को समझना, सांसारिक मोह को कम करना और परमात्मा से जुड़कर शांत व भक्तियुक्त जीवन जीना है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का मार्ग दिखाती है।


उपस्थित गणमान्य जन एवं श्रद्धालु

इस अवसर पर निम्नलिखित भक्त एवं व्यक्तित्व उपस्थित रहे:

  • बाबा शिवराम दास जी महाराज, लक्ष्मण दास जी महाराज, आचार्य गणेश दत्त पाराशर
  • गोपाल दास, पिन्टा पंडित, गोविंद सौखिया, गोकुल झालानी, शिवचरन शर्मा
  • कृष्ण बल्लभ शर्मा, राजू काका, रमेश अरोड़ा, बच्चू सिंह राजपूत, देवेंद्र बंसल
  • जुगला खण्डेलवाल, धनीराम धमारी वाले, सन्तोष शांडिल्य, सुरेश तुल्ला, सन्तोष खण्डेलवाल
  • राजरानी नसवारिया, बृज लता गांधी, लक्ष्मी सोनी सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष भक्त उपस्थित थे।
Pratahkal Newsroom

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