ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भागवताचार्य ने ध्रुव, प्रह्लाद और वामन अवतार के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति का महत्व समझाया।

डीग 24 फरवरी। जीव जीवन में जितना भी प्रयास कर ले, तपस्या कर सिद्धियां तो प्राप्त कर सकता है पर ईश्वर की प्राप्ति भक्ति से ही होगी। यह वाक्य शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर पर बाबा शिवराम दास जी महाराज पान्हौरी वाले के सानिध्य में आयोजित हो रही श्री मद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान भागवताचार्य पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहे।


कथा प्रसंग: ध्रुव, प्रह्लाद और वामन अवतार का वर्णन

  • उन्होंने कथा के भक्त ध्रुव, भक्त प्रह्लाद, वामन अवतार सहित अन्य कथाओं का भी वर्णन किया।

सत्कर्मों का ईश्वर को समर्पण अनिवार्य

श्रीमद्भागवत कथा में पूज्य पाराशर ने कहा कि:

"मनुष्य को अपने सभी सत्कर्म नारायण को समर्पित कर देने चाहिए। इसके अभाव में तपस्या और दान भी आध्यात्मिक लाभ नहीं देते। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कामना से भी परे गोपाल श्री कृष्ण की भक्ति है। ऐसे में भक्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर भी बार-बार भक्ति के लिए जन्म लेता है।"

भक्ति ही ईश्वर को पाने का साधन है और भक्त को अपने सब सत्कर्म ईश्वर के चरणों में समर्पित करने चाहिए। ईश्वर के चरणों में समर्पण किए बिना इन सद्कर्मों का फल भी नाशवान होता है।


उपस्थिति एवं गणमान्य जन

इस अवसर पर निम्नलिखित महानुभाव एवं श्रद्धालु मौजूद थे:

  • आचार्य गणेश दत्त पाराशर, धनीराम गुजरात वाले, दिनेष पाराशर।
  • पूर्व पार्षद महेंद्र शर्मा गुड्डू, महेश अग्रवाल, छीतरमल खण्डेलवाल।
  • गोपालदास, राजू काका, जुगला खण्डेलवाल, गोविंद सौखिया।
  • सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष मौजूद थे।
Pratahkal Newsroom

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