डीग में विद्या भारती बालिका उच्च प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित “सप्तशक्ति संगम मातृ सम्मेलन” में 140 से अधिक मातृशक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय नारी की सात शक्तियों, महिलाओं की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

डीग। विद्या भारती द्वारा संचालित बालिका उच्च प्राथमिक आदर्श विद्या मंदिर, डीग में बुधवार को “सप्तशक्ति संगम मातृ सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मातृशक्ति के योगदान, सांस्कृतिक विरासत और समाज में महिलाओं की सशक्त भूमिका पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर 140 से अधिक मातृशक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सम्मेलन को एक प्रेरणादायी मंच बना दिया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुनीता शर्मा, बालिका शिक्षा प्रमुख (भरतपुर), ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें माताओं के संस्कारों से ही पुष्ट होती हैं। उन्होंने भारतीय नारी की सात शक्तियों — कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा — के जागरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हर महिला में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होना चाहिए, क्योंकि वही समाज के उत्थान का आधार है।

मुख्य अतिथि सुमित्रा धंधेल, प्रधानाचार्य, ने अपने उद्बोधन में महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों और परिवारिक मर्यादाओं के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में नारी की जिम्मेदारी केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में उसकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने इंटरनेट और तकनीक के युग में इसके सदुपयोग की दिशा में भी मातृशक्ति को जागरूक रहने की प्रेरणा दी।

विशिष्ट अतिथि पूजा शर्मा ने भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर होती हैं, तो पूरा समाज प्रगति की दिशा में अग्रसर होता है। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्ष अधिवक्ता वंदना शर्मा ने संयुक्त परिवार व्यवस्था की परंपरा को सशक्त बनाए रखने में माताओं की जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए और नारी को परिवार का संतुलनकारी स्तंभ बताया।

कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने रानी लक्ष्मीबाई, मीराबाई और अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणादायी झांकियां प्रस्तुत कीं, जिनमें भारतीय नारी की वीरता, भक्ति और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत समावेश देखने को मिला। झांकियों की प्रस्तुति ने उपस्थित मातृशक्ति को भावविभोर कर दिया।

अंत में विद्यालय की सदस्य मनोरमा सैनी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उर्मिला वैष्णव, आशा शर्मा, बेला खंडेलवाल, आचार्या वर्षा शर्मा, दीप्ति, कीर्ति, श्री दत्त, लक्ष्मी शर्मा, नीलम तेजस्विनी और रंजना राठौर सहित अनेक गणमान्य महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की आचार्या बबीता ने संयम और गरिमा के साथ किया।

यह सम्मेलन न केवल महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर विमर्श का माध्यम बना, बल्कि मातृशक्ति के आत्मविश्वास और संस्कारशीलता का सशक्त प्रतीक भी सिद्ध हुआ।

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