दौसा में यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में निकली ‘यूजीसी रोलबैक’ रैली गांधी तिराहे पर जनसैलाब में बदल गई। कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन, भाजपा झंडा दहन और 8 मार्च को दिल्ली कूच के आह्वान ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है।

दौसा शहर शनिवार को उस समय राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का केंद्र बन गया, जब यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में ‘यूजीसी रोलबैक’ के समर्थन में निकली रैली देखते ही देखते विशाल जनसैलाब में बदल गई। सुबह सहज नाथ महादेव मंदिर से शांतिपूर्वक शुरू हुई यह रैली जैसे-जैसे शहर की सड़कों से आगे बढ़ी, उसका स्वरूप व्यापक होता गया और गांधी तिराहे तक पहुंचते-पहुंचते यह शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गई।


रैली लालसोट रोड और आगरा रोड से होते हुए गांधी तिराहे पहुंची, जहां “यूजीसी रोलबैक”, “समाज को मत बांटो” और “समाज की एकता कायम रहे” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा भारतीय जनता पार्टी का झंडा जलाने की घटना भी सामने आई, जिससे माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।




कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जब युवाओं ने बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया और हाईवे की ओर बढ़ने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और संभावित जाम की स्थिति को टाल दिया। प्रशासन की ओर से एसडीएम संजू मीणा को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें यूजीसी की नई गाइडलाइंस को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई।


रैली में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराणा ने जनसमूह को संबोधित करते हुए 8 मार्च को दिल्ली कूच का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज अब संगठित है और अपने बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज की एकजुटता पर जोर दिया और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


इस आयोजन की विशेषता यह रही कि यह किसी एक व्यक्ति के नेतृत्व में नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की सामूहिक भागीदारी से आयोजित हुआ। युवाओं के साथ-साथ 45 से 65 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। महिलाओं की अपेक्षाकृत कम भागीदारी के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का जुटना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।


रैली के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं को भीड़ के बीच अपनी उपस्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे दौसा में इस प्रकार की पहली ऐतिहासिक और व्यापक रैली बताया। प्रदर्शन के बाद जिले में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। जानकारों का मानना है कि इस भीड़ को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिशें भी तेज हो सकती हैं।


दौसा की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक विरोध प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि सामाजिक एकजुटता और भविष्य की रणनीति का संकेत भी देता नजर आया। अब सबकी निगाहें 8 मार्च को प्रस्तावित दिल्ली कूच पर टिकी हैं, जो इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव को तय करेगा।

Updated On 2 March 2026 9:19 PM IST
Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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