साल 2025 में भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली ने ऐतिहासिक बदलाव देखे। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, डिजिटल राशन प्रणाली, वन नेशन वन राशन कार्ड, MSP पर रिकॉर्ड खरीद, आधुनिक स्टील साइलो और एथेनॉल नीति ने गरीबों और किसानों की जिंदगी में बदलाव लाया।

India food security 2025 : साल 2025 भारतीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी साबित हुआ। इस दौरान गरीबों की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय, डिजिटल सुधार, आधुनिक भंडारण ढांचे और पारदर्शी राशन वितरण ने एक नया मानक स्थापित किया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत देश के लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया। कोविड-काल में शुरू हुई यह योजना अब अगले पांच साल तक जारी रहेगी। योजना के तहत कुल 1118 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किए गए, जिस पर सरकार ने लगभग 3.91 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।

2025-26 में TPDS, PM POSHAN, ICDS, SAG और आपदा राहत सहित कुल 608.16 लाख टन खाद्यान्न आवंटित किया गया। राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल किया गया, जिसमें 100% राशन कार्ड डिजिटाइज्ड, 99.9% आधार सीडिंग और 99.8% FPS पर e-POS मशीनें स्थापित की गईं। लगभग 98% लेन-देन बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से हो रहे हैं।

AI आधारित ASHA प्लेटफॉर्म ने राशन वितरण के बाद फीडबैक और शिकायत निपटान को स्वचालित कर दिया है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है, जिसमें अब तक 195.9 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन हुए हैं और 464.7 LMT अनाज वितरित किया गया।

खाद्यान्न परिवहन को भी आधुनिक बनाया गया। FCI ने 9527 रेल रेक और 63.69 LMT सड़क मार्ग के जरिए अनाज की आवाजाही सुनिश्चित की। किसानों को MSP पर रबी 2025-26 में 300.35 LMT गेहूं और खरीफ 2024-25 में 832.17 LMT धान खरीदकर लाभ प्रदान किया गया। मोटे अनाज और मिलेट्स की खरीद में भी लगातार वृद्धि हुई।

भंडारण व्यवस्था में सुधार के तहत 20.95 लाख जूट बैग आवंटित किए गए और गेहूं स्टॉक लिमिट लगाई गई ताकि जमाखोरी रोकी जा सके। फूड सब्सिडी के माध्यम से 2025-26 में 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जारी की गई। OMSS के तहत भारत आटा और भारत चावल की बिक्री जारी रही।

किसानों को गोदाम में रखे अनाज के बदले सस्ता ऋण देने के लिए ₹1000 करोड़ के कोष के साथ e-NWR आधारित किसान ऋण गारंटी योजना शुरू की गई। राशन सप्लाई चेन में IIT दिल्ली और WFP की मदद से रूट ऑप्टिमाइजेशन लागू किया गया, जिससे राज्यों को सालाना लगभग ₹250 करोड़ की बचत और CO₂ उत्सर्जन में कमी हुई।

PPP मोड में बड़े पैमाने पर स्टील साइलो बनाए जा रहे हैं और Depot Darpan Portal व Bhandaran 360 ERP से डिजिटल निगरानी शुरू हुई। चीनी उद्योग में 534 मिलें सक्रिय रहीं और एथेनॉल मिश्रण 19.24% तक पहुंचा। पिछले दस वर्षों में एथेनॉल से चीनी मिलों को ₹1.29 लाख करोड़ से अधिक की आय हुई।

राज्यवार खाद्य सब्सिडी में भी बड़ी मात्रा में वितरण हुआ। बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, झारखंड और DBT (यूटी) के तहत राज्यों को करोड़ों रुपये की सब्सिडी जारी की गई।

साल 2025 ने देश में खाद्य सुरक्षा, डिजिटल राशन प्रणाली, किसान कल्याण, एथेनॉल नीति, आधुनिक भंडारण और पारदर्शी वितरण के क्षेत्र में एक नया ऐतिहासिक मानक स्थापित किया।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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