मुंबई में राजस्थानी मोट्यार परिषद ने उठाई राजस्थानी भाषा संरक्षण और शिक्षा अधिकारों की आवाज

राजस्थानी मोट्यार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिवदान सिंह जोलावास ने मुंबई में प्रवासी राजस्थानी संगठनों के पदाधिकारियों, राजस्थानी सिनेमा से जुड़े निर्देशकों, निर्माताओं, कलाकारों एवं प्रतिनिधियों से मुलाकात कर महाराष्ट्र में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित करने और उच्च शिक्षा में राजस्थानियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठाई।

अंधेरी (पूर्व) और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में आयोजित अलग-अलग बैठकों में मेवाड़ एकता फाउंडेशन एवं राजस्थान एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए डॉ. जोलावास ने कहा कि राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि राजस्थानी भाषा को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने राजस्थानी भाषा, लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए ठोस पहल की आवश्यकता बताई।

डॉ. जोलावास ने कहा कि महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों में प्रवासी राजस्थानी समाज व्यापार, उद्योग, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से दूर होती जा रही है।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र स्थापित करने तथा उच्च शिक्षा में राजस्थानियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्थागत स्तर पर प्रयास जरूरी हैं।

बैठकों में मौजूद प्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि भाषा समाज की पहचान होती है और इसके संरक्षण के लिए ठोस प्रयास आवश्यक हैं।

इस अवसर पर राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन के सचिव सन्नी मंडावरा, चित्रा जेटली, अमित जैन, सुनील राजपुरोहित, गौरव सिंघवी, विनोद सारस्वत सहित अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस संबंध में जानकारी राजस्थान मोट्यार परिषद् के प्रवक्ता सुनील राजपुरोहित ने दी।

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