मुंबई में दूध कारोबारियों का आंदोलन तेज, एफडीए कार्यालय पर धरना; संजय निरूपम ने शिंदे से मुलाकात का दिया भरोसा
मुंबई में खुले दूध के कारोबार पर नए नियमों के विरोध में मेवाड़ एकता फाउंडेशन के नेतृत्व में सैकड़ों दूध कारोबारियों ने एफडीए कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। गोरेगांव की आमसभा में आंदोलन की रणनीति बनी और संजय निरूपम ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर मांगें रखने का भरोसा दिया।

तस्वीर में गोरेगांव स्थित मेवाड़ भवन में आयोजित आमसभा के दौरान मंच पर बैठे मेवाड़ एकता फाउंडेशन के पदाधिकारी और अन्य सदस्य दिख रहे हैं।
मुंबई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा खुले दूध के कारोबार को लेकर लागू किए जा रहे नए नियमों के विरोध में शुक्रवार को मेवाड़ एकता फाउंडेशन, मुंबई के नेतृत्व में सैकड़ों दूध कारोबारियों ने बांद्रा स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कारोबारियों ने एफडीए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर नए नियमों को लागू करने से पहले पर्याप्त समय देने और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की। इसके बाद गोरेगांव स्थित मेवाड़ भवन में आयोजित आमसभा में आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया।
मेवाड़ एकता फाउंडेशन के अध्यक्ष जीवन सिंगवी ने बताया कि मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में दूध व्यवसायी साइकिलों के साथ बांद्रा पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
गोरेगांव स्थित मेवाड़ भवन में आयोजित आमसभा को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद एवं शिवसेना नेता संजय निरूपम ने कहा कि वह जल्द ही मेवाड़ एकता फाउंडेशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर दूध कारोबारियों की मांगों को उनके समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि नए नियमों से हजारों मेवाड़ी प्रवासी परिवारों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के अनेक परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। सरकार को छोटे और पारंपरिक दूध कारोबारियों की समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दूध कारोबारियों की जायज मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा तथा उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
मेवाड़ एकता फाउंडेशन के उपाध्यक्ष भंवरलाल जोशी ने दूध कारोबारियों के आंदोलन को तेज करने का रोडमैप सभा के समक्ष रखा और आगे की रणनीति पर अपने विचार रखे।
सभा में अधिवक्ता ललिता राजगुरु ने नए नियमों की कानूनी जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखकर नियमों की समीक्षा आवश्यक है। वहीं संगठन के विधि सलाहकार हितेश राजगुरु ने एफडीए के नियमों के लगभग 100 बिंदुओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत करते हुए कहा कि नियमों में कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं। उन्होंने कहा कि खुले दूध के कारोबार में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिन्हें लागू करने से पहले पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
बैठक में कारोबारियों ने बताया कि मुंबई में लगभग 10 प्रतिशत दूध व्यवसाय आज भी तबेलों पर निर्भर है। यदि पैकेजिंग व्यवस्था अनिवार्य की जाती है तो छोटे कारोबारियों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए पर्याप्त समय और आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेयरियों में स्वच्छता और गुणवत्ता संबंधी नियमों का पालन होना चाहिए तथा मिलावट या अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से व्यवसाय करने वाले छोटे कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
इस दौरान दूध कारोबारियों की पीड़ा भी सामने आई। उन्होंने कहा, "हम और हमारे पुरखों ने एक समय खिचड़ी और एक समय रोटी खाकर मुंबई में संघर्ष किया। दिन-रात मेहनत कर इस व्यवसाय को खड़ा किया और लाखों परिवारों तक ईमानदारी से दूध पहुंचाया। आज अचानक लागू किए गए नियमों से हमारी वर्षों की मेहनत और रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।"
कारोबारियों ने सरकार से मांग की कि नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए तथा छोटे दूध व्यवसायियों को पर्याप्त मोहलत दी जाए, ताकि वे नई व्यवस्था के अनुरूप अपने व्यवसाय को ढाल सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कानून का विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी आजीविका की रक्षा करना है।
कार्यक्रम में भंवरलाल जोशी, दुर्गा शंकर जोशी, यश जोशी, भरत राजपुरोहित, मुरली रावल, लिलेश व्यास, दुर्गेश मेहता, नरेश जोशी, नंदकिशोर बागोरा, जगदीश राजपुरोहित, किशन व्यास, अर्जुन जोशी और सीताराम जोशी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं दूध व्यवसायी उपस्थित रहे। आमसभा में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर व्यापक चर्चा के साथ कारोबारियों ने सरकार से छोटे दूध व्यवसायियों के हितों की रक्षा करते हुए नए नियमों को पर्याप्त समय देकर चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग दोहराई।

