चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर में जिला प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग द्वारा 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। पूजा कुमावत और प्रधानाध्यापक बाबू लाल गाडरी की उपस्थिति में बाल विवाह के स्वास्थ्य जोखिमों, कानूनी प्रावधानों और लाडो प्रोत्साहन जैसी सरकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा कर समाज को जागरूक किया गया।

चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर कस्बे में सामाजिक चेतना की एक नई अलख जगाते हुए बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध शंखनाद किया गया है। जिला प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित '100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भूपालसागर में एक गरिमामयी और उद्देश्यपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल एक सरकारी औपचारिकता मात्र था, बल्कि समाज की जड़ों में बैठी कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करने और भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास बनकर उभरा।

महिला अधिकारिता विभाग चित्तौड़गढ़ के निदेशक के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की कमान पर्यवेक्षक पूजा कुमावत ने संभाली। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पूजा कुमावत ने बाल विवाह के उन भयावह पहलुओं को उजागर किया जो अक्सर लोक-लाज के पर्दे के पीछे छिपे रह जाते हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे कम उम्र में विवाह न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ भी है। छोटी उम्र में गर्भधारण और शारीरिक परिपक्वता के अभाव में स्वास्थ्य जोखिमों का बढ़ना और शिक्षा के अनमोल अवसरों का हाथ से निकल जाना, एक विकसित समाज के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।

कार्यशाला के दौरान विमर्श का दायरा केवल बाल विवाह तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि लिंग आधारित अपराधों की गंभीर चुनौती पर भी चर्चा की गई। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, बढ़ती यौन हिंसा, घरेलू हिंसा और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया गया। उपस्थित जनसमूह और विद्यार्थियों को सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे वन स्टॉप सेंटर, महिला सुरक्षा सलाह केंद्र, पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र, लाडो प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सकें।

शिक्षा के इस मंदिर में आयोजित इस संवाद के दौरान स्थानीय नेतृत्व और शिक्षाविदों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक बाबू लाल गाडरी, अध्यापक सत्यनारायण मीणा, हुकुम सिंह, किशन वर्मा, पूरण चंद बैरवा और अध्यापिका अनीता मीणा सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में समाज से इस कुरीति को जड़ से मिटाने का संकल्प दोहराया। इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब प्रशासन और समाज एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो बदलाव की बयार को रोकना नामुमकिन है। यह कार्यशाला भूपालसागर में एक स्वस्थ, शिक्षित और सुरक्षित समाज की नींव रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Bureau

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