मुख्य सड़क पर अतिक्रमण से ठप हुआ चिकारड़ा, रोज़ाना 5 से 8 घंटे तक जाम से जनजीवन बेहाल
चिकारड़ा में निम्बाहेड़ा–मंगलवाड़ राजमार्ग पर अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था के कारण रोज़ाना 5 से 8 घंटे तक जाम लग रहा है। सांवलिया धाम मार्ग होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। एंबुलेंस तक फंस रही हैं, ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

चिकारड़ा।
निम्बाहेड़ा–मंगलवाड़ राजमार्ग पर स्थित चिकारड़ा गांव इन दिनों भीषण यातायात संकट से जूझ रहा है। गांव के मुख्य हिस्से से गुजरने वाली सड़क पर बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण और वाहन चालकों की मनमर्जी के चलते यहां रोज़ाना घंटों लंबा जाम लग रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आमजन से लेकर राहगीरों और श्रद्धालुओं तक का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
यह राजमार्ग क्षेत्र के सबसे व्यस्त मार्गों में शुमार है, जो कानोड़, धरियावद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा के साथ उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा को जोड़ता है। यही मार्ग प्रसिद्ध सांवलिया धाम तक भी जाता है, जो चिकारड़ा से मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मध्यप्रदेश से सांवलिया धाम दर्शन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालु भी इसी सड़क का उपयोग करते हैं, जिससे यातायात दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
गांव के मुख्य क्षेत्र में सड़क किनारे और नालियों पर किए गए अतिक्रमण के कारण सड़क अत्यंत संकरी हो चुकी है। स्थानीय निवासी प्रकाश सुथार के अनुसार, मकान, दुकानें और अन्य निर्माण सड़क सीमा तक फैल चुके हैं, जिससे दो भारी वाहन एक साथ निकल पाने की स्थिति नहीं रहती। जैसे ही आमने-सामने ट्रक या बसें आ जाती हैं, सड़क पर लंबा जाम लग जाता है। कई बार वाहन घंटों तक रेंगते रहते हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थिति का सबसे गंभीर पहलू यह है कि आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंस जाती हैं। एंबुलेंस का समय पर निकल पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ग्रामीणों को मजबूरी में वैकल्पिक कच्चे मार्गों से एंबुलेंस निकालने का प्रयास करना पड़ता है। मेगा हाईवे के किनारों पर भी कई स्थानों पर अतिक्रमण होने से समस्या और विकराल हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को बार-बार शिकायतें दी गईं, केम्पों के माध्यम से भी अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दस दिनों में जाम की अवधि कभी दो घंटे तो कभी आठ घंटे तक पहुंच गई, बावजूद इसके पुलिस और प्रशासनिक अमला यातायात व्यवस्था संभालने में नाकाम रहा।
शनिवार को स्थिति उस समय चरम पर पहुंच गई, जब शाम करीब 4:30 बजे लगा जाम रात 11 बजे के बाद ही सामान्य हो सका। वाहन चालकों और यात्रियों के लिए सड़क पर सांप रेंगने जैसी स्थिति बनी रही।
ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि डूंगला की तर्ज पर चिकारड़ा में भी मुख्य राजमार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि भारी वाहनों का दबाव कम हो और जाम की समस्या से स्थायी निजात मिल सके। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं चलाया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन से जनहित में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
