चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर में शीतलहर और घने कोहरे का कहर जारी है, जहाँ न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। संवाददाता अरविंद गर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। जानिए कैसे हाड़ कंपाने वाली सर्दी ने यातायात और बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और हाड़ कंपाने वाली शीतलहर ने समूचे जनजीवन को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सोमवार को प्रकृति के तल्ख तेवरों के चलते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई और न्यूनतम पारा 6 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुँचा। कड़ाके की इस ठंड ने न केवल गलन बढ़ाई है, बल्कि दिन चढ़ने के बाद भी लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। सुबह से ही कोहरे की घनी चादर ने समूचे क्षेत्र को ढक लिया, जिससे दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य के करीब पहुँच गई और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

क्षेत्र के बाजारों और चौराहों पर सुबह 10 बजे तक सन्नाटा पसरा रहा। जो वाहन चालक सड़क पर निकले, उन्हें घने कोहरे के कारण भारी मशक्कत करनी पड़ी। ठंड का असर इतना व्यापक रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने दैनिक कार्यों को त्यागकर घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। बाजार की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा और दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही नगण्य रही। दोपहर के समय भी सूरज की तपिश बेअसर साबित हुई, जिसके चलते स्थानीय निवासियों के पास अलाव ही एकमात्र सहारा बचा रहा।

बाजार के प्रमुख केंद्रों और चाय की थड़ियों पर लोग प्लास्टिक की कुर्सियां डालकर अलाव तापते नजर आए। यह अलाव न केवल ठंड से राहत का जरिया बने, बल्कि सामाजिक मेलजोल का केंद्र भी बन गए, जहाँ बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की टोलियां मौसम और समसामयिक विषयों पर चर्चा करती दिखीं। चाय और गर्म नाश्ते की दुकानों पर विशेष भीड़ देखी गई, जहाँ लोग गर्म पेय पदार्थों के साथ शरीर की गर्माहट बनाए रखने का प्रयास कर रहे थे। दुकानदारों का कहना है कि अत्यधिक गलन के कारण व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं, क्योंकि लोग बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक शीतलहर का यह प्रकोप थमने वाला नहीं है। तापमान में और अधिक गिरावट की संभावना ने स्थानीय प्रशासन और आमजन की चिंता बढ़ा दी है। संवाददाता अरविंद गर्ग द्वारा संकलित जानकारी के अनुसार, वर्तमान में समूचा भूपालसागर क्षेत्र भीषण सर्दी की चपेट में है और आने वाले समय में कड़ाके की ठंड से राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।

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