चित्तौड़गढ़: नशे के विरुद्ध युवाओं की हुंकार, शपथ लेकर थामी 'नई किरण' की मशाल
चित्तौड़गढ़ में एनएसएस शिविर के दौरान 'नई किरण नशा मुक्ति अभियान' के तहत विद्यार्थियों ने नशे के विरुद्ध शपथ ली। प्राचार्य डॉ. भारती मेहता के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. राजेश कुमार स्वामी ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से आगाह किया, वहीं महावीर इंटरनेशनल के सहयोग से थैलेसीमिया पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। यह रिपोर्ट युवाओं को सशक्त बनाने की एक विशेष पहल है।

चित्तौड़गढ़। भविष्य की नींव कहे जाने वाले युवाओं को नशे की गर्त से सुरक्षित निकालने और उन्हें सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के संकल्प के साथ चित्तौड़गढ़ में एक प्रभावी पहल की गई है। यहाँ आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर के दौरान 'नई किरण नशा मुक्ति अभियान' के अंतर्गत एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने न केवल विद्यार्थियों को जागरूक किया बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी प्रवाहित किया। महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. भारती मेहता के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय युवाओं को नशे की विभीषिका से परिचित कराकर उन्हें एक सशक्त और अनुशासित राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. भारती मेहता ने अत्यंत ओजस्वी शब्दों में विद्यार्थियों का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा न केवल स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि एक होनहार व्यक्तित्व के सपनों की बलि भी चढ़ा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, अनुशासित एवं सशक्त युवा बनने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने भी अपनी उपस्थिति से शैक्षणिक वातावरण को ज्ञानवर्धक बनाया। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजेश कुमार स्वामी और भरत कुमार शर्मा ने नशा मुक्ति के मनोवैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से यह समझाया कि किस प्रकार नशे की लत मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बाधित कर जीवन को अंधकारमय बना देती है।
इसी क्रम में स्वास्थ्य जागरूकता के एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम को स्पर्श करते हुए महावीर इंटरनेशनल के सहयोग से बलवंत सिंह सिसोदिया एवं अभय सिंह संजेती ने थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी पर विद्यार्थियों को उपयोगी जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सही जानकारी और समय पर जांच से इस अनुवांशिक बीमारी के विरुद्ध लड़ाई लड़ी जा सकती है। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रभावी क्षण वह रहा, जब परिसर में उपस्थित सभी विद्यार्थियों ने एक स्वर में नशा मुक्त रहने की शपथ ग्रहण की। इस संकल्प को डिजिटल इंडिया की भावना से जोड़ते हुए ऑनलाइन नशा मुक्ति शपथ हेतु एक लिंक भी साझा किया गया, ताकि यह अभियान केवल परिसर तक सीमित न रहकर एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सके।
इस पूरे गरिमामयी आयोजन का कुशल संचालन डॉ. हेमलता महावर एवं बालकृष्ण लड्ढा द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम अधिकारी सुशील काबरा एवं भारती भावनानी का विशेष सहयोग रहा, जिनके प्रयासों से यह आयोजन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़ के युवाओं द्वारा नशे के विरुद्ध छेड़ा गया एक ऐसा अभियान है, जो आने वाले समय में एक स्वस्थ और व्यसनमुक्त समाज की आधारशिला रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

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